ऑक्सीजन लेवल कम होने की वजह से ही तड़के हार्ट अटैक की घटनाएं अधिक होती हैं। ब्लड शुगर अनियंत्रित होता है और ब्रेन स्ट्रोक भी पड़ता है। सिर दर्द, चिड़चिड़ापन, खराब याददाश्त की भी दिक्कत होती है। गले की परिधि 43 सेमी से अधिक होने वाले व्यक्ति को नींद की दिक्कत स्लीप एप्निया होने का खतरा बढ़ जाता है।
व्यक्ति की गहरी नींद का वो ही हिस्सा डिस्टर्ब हो रहा है जिसमें शरीर की खराबी की मरम्मत होती है। लोगों की क्वालिटी नींद की अवधि घट गई है और बीमारियां बढ़ रही हैं। सामान्य व्यक्ति के क्वालिटी नींद के 90-90 मिनट के पांच से सात चरण होते हैं। प्रत्येक चरण के चार हिस्से होते हैं।
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आईएमएसीजीपी के रिफ्रेशर कोर्स में भोपाल एम्स के विशेर्ष डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि गहरी नींद जिसे नॉन रैपिड आई मूवमेंट (एनआरईएम) या साउंड स्लीप कहते हैं उसमें ही शरीर की रिपेयरिंग होती है। प्रदूषण के कारण नाक, गला और सांस की नली में आ रहे अवरोध से नींद जल्दी-जल्दी टूट जाती है।
व्यक्ति को खर्राटे आने से शरीर का ऑक्सीजन लेवल गिरता है। इससे हार्ट अटैक भी पड़ सकता है। आईएमएसीजीपी रिफ्रे शर कोर्स का आयोजन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में किया गया। विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति को पांच से सात नींद चक्र लेने चाहिए।
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एक चक्र 90 मिनट का होता है। 12 से 15 फीसदी लोगों का नींद चक्र डिस्टर्ब हो गया है। क्वालिटी नींद घटने का सेहत पर बुरा असर पड़ता है। शरीर में गांठें, डायबिटीज, अवसाद जैसे रोग बढ़ने लगते हैं। नाक और गले में अवरोध होने से खर्राटे आने लगते हैं।
कुछ लोगों के खर्राटे की अधिकतम ध्वनि सौ डेसिबिल तक होती है। लोगों की नींद बीच में टूट जाती है। ऐसा मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी होने से होता है। चूंकि नींद बहुत कम समय के लिए टूटती जिससे लोग इस पर अधिक ध्यान नहीं देते। लेकिन नींद चक्र बिगड़ जाता है।
एम्स दिल्ली के एक सर्वे के हवाले से उन्होंने बताया कि नींद डिस्टर्ब होने से मोटापा, स्ट्रेस और अवसाद बढ़ता है। नपुंसकता बढ़ती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटती है। ऑक्सीजन लेवल कम होने की वजह से ही तड़के हार्ट अटैक की घटनाएं अधिक होती हैं। ब्लड शुगर अनियंत्रित होता है और ब्रेन स्ट्रोक भी पड़ता है।
सिर दर्द, चिड़चिड़ापन, खराब याददाश्त की भी दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि गले की परिधि 43 सेमी से अधिक होने वाले व्यक्ति को नींद की दिक्कत स्लीप एप्निया होने का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. गुप्ता ने नींद की जांच के संबंध में भी जानकारी दी। इस मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. ब्रजेंद्र शुक्ला, डॉ. निशांत सक्सेना, डॉ. शालिनी मोहन, डॉ. कुणाल सहाय मौजूद रहे।