जापान की क्याेताे यूनिवर्सिटी रिसर्च में आईआईटी कानपुर की मदद करेगी। इस पर समझौता हो गया। ज्वाइंट डिग्री प्रोग्राम चलाने पर भी सहमति बनी है। यानी दोनों इंस्टीट्यूट मिलकर नया कोर्स लांच करेंगे, फिर निर्धारित अंतराल पर पढ़ाई और रिसर्च कराके डिग्री बांटेंगे। ऐसा पहली बार होगा। अभी जापान के साथ ज्वाइंट डिग्री प्रोग्राम नहीं चल रहा। इस समझौते से इंस्टीट्यूट की अंतरराष्ट्रीय साख मजबूत होगी।
क्याेताे यूनिवर्सिटी जापान की प्रो-वाइस चांसलर का प्रतिनिधि मंडल 28 अक्तूबर को कानपुर आया था। प्रतिनिधि मंडल ने लैब, लाइब्रेरी, क्लास रूम और कैंपस का निरीक्षण किया, फिर निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना से मिलकर शैक्षिक और शोध की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया था। निदेशक ने बताया कि क्याेताे यूनिवर्सिटी के साथ स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम का अहम समझौता हुआ है। क्याेताे यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट आईआईटी कानपुर में आएंगे और आईआईटी कानपुर के स्टूडेेंट जापान जाकर पढ़ाई, लिखाई और रिसर्च करेंगे। यह सिलसिला चलता रहेगा। रिसर्च वर्क को मिलकर आगे बढ़ाया जाएगा। सोलर एनर्जी, पर्यावरण प्रदूषण, बिजली और पानी के क्षेत्र में रिसर्च पर जोर होगा। ज्वाइंट डिग्री प्रोग्राम चलाने का समझौता भी हुआ है। आईआईटी कानपुर का प्रतिनिधि मंडल जल्द ही जापान जाएगा।
मंत्रालय को भेजा 2177 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
आईआईटी कानपुर की ग्लोबल रैंकिंग में सुधार का प्रोजेक्ट ‘विश्वजीत’ मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) को भेज दिया गया। प्रोजेक्ट 2177 करोड़ रुपये का है। अब मंजूरी देेने का काम मंत्रालय का है। आईआईटी कानपुर प्रशासन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च कंपानेंट को बढ़ाने पर जोर दिया है। साइबर और डिजिटल सिक्योरिटी पर भी फोकस होगा।