दुनिया भर में भले ही आईआईटी कानपुर का डंका बज रहा हो, लेकिन आज भी जेईई एडवांस रैंकर की पहली पसंद आईआईटी मुंबई या आईआईटी दिल्ली या मद्रास ही रहते हैं। इसके बाद ही कहीं जाकर कानपुर का नंबर आता है। कंप्यूटर साइंस लेने के इच्छुक रैंकर भी पहले अन्य आईआईटी ही देखते हैं।
न मिलने पर कुछ तो ब्रांच बदल लेते हैं और कुछ ही आईआईटी आते हैं। पिछले कुछ सालों से टॉप 100 रैंकर छात्रों ने आईआईटी में दाखिला नहीं लिया था। इसी को देखते हुए संस्थान ने छात्रों को आकर्षित करने के लिए इसकी शुरुआत की है।
निदेशक प्रो. करंदीकर ने जब ट्वीट कर इसकी जानकारी दी, तो कुछ लोगों का कहना है कि संस्थान में ऐसी स्कीम शोभा नहीं देती। उनका कहना है कि टॉप 100 रैंकर को यह सुविधा ठीक नहीं है, सभी इसके हकदार हैं। यह तो ऐसा है जैसे कोई कोचिंग संस्थान छात्रों को लाने पर इंसेंटिव देता है।
वहीं, निदेशक प्रो.अभय करंदीकर ने कहा कि कई ऐसे मेधावी छात्र हैं जिनकी रैंक अच्छी है, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे टॉप 100 छात्रों को यह सुविधा मिलेगी। उनके बीटेक के सभी चार साल की पढ़ाई हॉस्टर, स्टेशनरी, बुक, स्वास्थ्य सभी का खर्चा दिया जाएगा।