एक काली कार में घूमते हुए दिखाई दिया
उससे पहले तक पीड़िता आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर दबाव बना रही थी जबकि आरोपी लगातार उसपर केस वापस लेने, बयान न देने और बयान वापस लेने क दबाव बनाने के साथ ही उसके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा था। इधर, एसीपी अपने दो अन्य साथियों के साथ पुलिस कार्यालय से लेकर शहर के कई थानाक्षेत्रों में एक काली कार में घूमते हुए दिखाई दिया।
बयान दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी
साथ ही उसने कई पुलिस कर्मियों से संपर्क कर छात्रा को बयान बदलने के लिए कहते सुना गया, तो आला अधिकारियों ने हाईकोर्ट में उसकी कारगुजारी को पहुंचाने का निर्देश जारी कर दिया। उच्चाधिकारियों के सख्त रुख के बाद आरोपी ने एसआईटी के एक सदस्य से संपर्क कर शनिवार को अपना पक्ष रखने की बात कही है। एसीपी अभिषेक पांडेय ने बताया कि एसीपी और छात्रा का शनिवार को बयान दर्ज किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह था पूरा मामला
आईआईटी की पीएचडी छात्रा ने 12 दिसंबर को कलक्टरगंज में तैनात रहे पूर्व एसीपी मोहसिन खान पर शादी का झांसा देकर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद एसीपी को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। 19 दिसंबर को हाईकोर्ट ने मोहसिन की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
2023 को पहली बार एक कार्यक्रम में मिले थे दोनों
आईआईटी से पीएचडी कर रही छात्रा ने कल्याणपुर थाने में एसीपी मोहसिन खान पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि एसीपी उससे तीन दिसंबर 2023 को पहली बार एक कार्यक्रम में मिले थे। इसके बाद जून 2024 में उससे संपर्क किया और आईआईटी कानपुर में पीएचडी में प्रवेश के लिए मदद मांगी।
शादी का वादा कर संबंध बनाया
इस पर उनकी मदद की और योग्यता के आधार पर उन्हें प्रवेश मिल गया। बाद में दोनों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध हो गए। इसी दौरान एसीपी ने अपनी पत्नी को तलाक देकर उससे शादी का वादा कर संबंध बनाया। एसीपी ने दर्ज एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की।
मोहसिन शादीशुदा हैं, तब भी संबंध बनाए
याची के अधिवक्ता इरफान उल्ला व विनीत विक्रम ने दलील दी कि एफआईआर में छात्रा की ओर से लगाए गए आरोप झूठे हैं। उसे यह जानकारी थी कि मोहसिन शादीशुदा हैं, तब भी उसने मर्जी से संबंध बनाए। वह पढ़ी-लिखी हैं। उसका यह कहना कि झांसा देकर संबंध बनाया गया, समझ से परे है। न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद एसीपी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।