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सरहद से लेकर जंगल तक की रक्षा करेगा एयरोस्टेट ड्रोन, आईआईटी के वैज्ञानिकों ने किया तैयार

Thu, 22 Aug 2019 05:16 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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आईआईटी ने तैयार किया गुब्बारे के आकार एयरोस्टेट ड्रोन - फोटो : अमर उजाला
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आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन विजन बेस्ड तकनीक पर ड्रोन तैयार किया है। गुब्बारे के आकार के इस ड्रोन को एयरोस्टेट नाम दिया गया है। यह ड्रोन सरहद से लेकर जंगल तक की रक्षा में काम आएगा।
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बुधवार को इसका सफल परीक्षण आईआईटी की एयर स्ट्रिप में किया गया। इसे एयरोस्पेस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. निश्चल वर्मा की अगुवाई में नवीन जांगरा, मोहित गुप्ता, शुलभ मंगल आदि छात्रों की टीम ने मिलकर बनाया है। बारिश हो या आंधी-तूफान, बर्फबारी हो या गर्मी, हर मौसम में एक से पांच किलोमीटर की दूरी तक यह ड्रोन आसानी से निगरानी रख सकता है।

यही नहीं पहाड़ी इलाकों में जहां इंटरनेट की सुविधा नहीं होती, वहां इसके माध्यम से लोगों तक वाईफाई की सुविधा भी पहुंचाई जा सकती है। परीक्षण के दौरान आईआईटी के उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल सहित कई अन्य प्रोफेसर एवं वन विभाग के अफसर मौजूद रहे।
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जंगलों में तस्करी रोकने में होगा मददगार
जल्द ही इस गुब्बारे की मदद से वन विभाग प्रदेश के सभी जंगलों में लकड़ी और जानवरों की तस्करी रोकने, जानवरों को विभिन्न हादसों से बचाने का काम किया जाएगा। ड्रोन के परीक्षण के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार, मुख्य वन संरक्षक लखनऊ रमेश पांडेय, मुख्य वन संरक्षक कानपुर ओपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक लखनऊ विष्णु सिंह, निदेशक दुधवा संजय पाठक आदि मौजूद रहे।

वन विभाग को जल्द सौंपेगे तकनीक
प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तर प्रदेश पवन कुमार ने आईआईटी की तकनीक देखकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के सभी जंगलों में काफी कारगर साबित होगा। बताया कि अभी घने जंगलों में जानवरों पर निगरानी रखना, जंगल के अंदर हो रहे गलत कामों पर रोक पाना काफी मुश्किल होता था लेकिन इस ड्रोन के सहारे यह सब कुछ संभव हो सकेगा। बताया कि संस्थान जल्द इस तकनीक को वन विभाग को सौंपेगा।
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कंट्रोल रूम में दिखेगा सब कुछ 
प्रो. निश्चल वर्मा बताते हैं कि गुब्बारे के अंदर डे और नाइट दोनों ही कैमरे सेट हो सकेंगे। आवश्यकतानुसार इसमें किसी भी तरह के कैमरे लगाए जा सकते हैं। इसमें एआई तकनीक के जरिये फेस डिटेक्शन तकनीक भी दी गई है। इससे कैमरे की नजर जहां-जहां घूमेगी कंट्रोल रूम में बैठा शख्स जान जाएगा कि मौके पर कितने लोग हैं और क्या कर रहे हैं। जानवर कौन सा है और कितने जानवरों का झुंड है आदि जानकारी मिल सकेगी। बगैर इंटरनेट भी इसका प्रयोग किया जा सकेगा। तब विजुअल के बजाय तुरंत जानवर या इंसान की संख्या आपके कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी। आईआईटी की इस तकनीक का परीक्षण पिछले दिनों दुधवा इंटरनेशनल पार्क में भी किया जा चुका है।

दुश्मनों पर गोलियां भी दाग सकेगा ड्रोन
एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष ने बताया कि जरूरत पड़ने पर इस गुब्बारे नुमा ड्रोन को हथियारों से भी लैस किया जा सकता है। कंट्रोल रूम से दुश्मनों पर गोलियां दागी जा सकेंगी। इसे तैयार करने वाले डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला ने बताया कि अगर सरहद पर दुश्मन इस गुब्बारे पर गोलियां दागेगा तो यह तुरंत नीचे नहीं गिरेगा बल्कि कम से कम 15 मिनट बाद नीचे आएगा। इसके अंदर की सभी मशीनें भी सुरक्षित रहेंगी। 
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