कानपुर। सांस के रोगी पटाखे दगने वाली जगह से थोड़ा दूर रहें और मास्क लगाएं। रोगी के अलावा अगर धुएं के कारण सामान्य व्यक्ति की सांस फूल रही है तो तुरंत भाप लें। विशेषज्ञों का कहना है कि भाप लेने से आराम मिलेगा। अगर दिक्कत बनी रहती है तो फिर डॉक्टर के पास जाएं। इसके अलावा आंख में अगर चिंगारी या धुआं चला जाए तो आंखें मलें नहीं उसे साफ पानी से 15-20 मिनट तक धोएं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला और हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि हैलट इमरजेंसी में जले रोगियों के लिए आरक्षित बेड पर मॉनीटर लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही वार्ड एक में भी व्यवस्था रहेगी। पटाखे या आग से जलने पर उसे ठंडे पानी से धोने के बाद अस्पताल आ जाएं। जख्म को सूती कपड़े से ढंके रहें जिससे धूल आदि न लगने पाए। बर्फ लगाने से नुकसान होता है।
आंख में चिंगारी या धुआं लगने पर बिल्कुल मलें नहीं और न ही बाहर से खरीदकर कोई दवा डालें। साफ पानी से धोएं। आराम न मिले तो अस्पताल में आकर विशेषज्ञ को दिखा लें। सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. आनंद का कहना है कि अस्थमा और सीओपीडी के रोगी खासतौर पर धुएं से बचें। एक बार भाप जरूर लें। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हृदय, गुर्दा और लिवर के रोगी खानपान पर ध्यान रखें। विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी के साथ हर चीज खाएं। बहुत अधिक खाने से दिक्कत हो सकती है। डायबिटीज अनियंत्रित हो सकती है जिससे नुकसान होगा।