दरअसल, जय प्रकाश वर्ष 1991 और 1996 में भाजपा के टिकट पर और 1999 में भाजपा-लोकतांत्रिक कांग्रेस के गठबंधन से लोकतांत्रिक कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव जीते थे। इसके बाद वह वर्ष 2019 में फिर से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे और सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा को हराने में कामयाब रहे।
भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं जय प्रकाश
मतलब यह कि चार बार एक ही लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने जाने के किंदरलाल के रिकॉर्ड की बराबरी जय प्रकाश पिछले चुनाव में कर चुके हैं। जय प्रकाश फिर से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। अगर वह जीत जाते हैं तो एक ही लोकसभा क्षेत्र (हरदोई) से पांच बार जीतने वाले नेता बन जाएंगे।
सपा प्रत्याशी के रूप तीन बार जीत चुकी हैं ऊषा वर्मा
इसी तरह सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा भी किंदरलाल के रिकॉर्ड की बराबरी करने की जोर आजमाइश करेंगी। ऊषा वर्मा सपा प्रत्याशी के रूप में वर्ष 1998, 2004 और 2009 में लोकसभा का चुनाव जीत चुकी हैं। मतलब यह कि अगर इस बार के लोकसभा चुनाव में मतदाता उनको दिल्ली पहुंचा देते हैं तो वह भी एक ही क्षेत्र से चार बार सांसद रहने के बाबू किंदरलाल और भाजपा नेता जय प्रकाश के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगी।
बनेगा एक ही क्षेत्र से हारने का रिकॉर्ड
अगर वह इस बार भी चुनाव हार जाती हैं, तो लगातार तीन लोकसभा चुनाव एक ही क्षेत्र से हारने का रिकॉर्ड भी उनके नाम हो जाएगा। हालांकि पिछले तीन चुनाव उन्होंने मजबूती से लड़े, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई। वर्ष 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में सांडी से भाजपा प्रत्याशी से हार गई थीं।
किंदरलाल की हैट्रिक का रिकॉर्ड रहेगा बरकरार
चुनाव में भाजपा जीते या सपा लेकिन किंदरलाल का एक रिकॉर्ड फिर भी कायम रहेगा। दरअसल, लगातार एक ही क्षेत्र से लोकसभा के तीन चुनाव जीतने का रिकार्ड किंदरलाल के नाम है। 1962, 1967 और 1971 के लोकसभा चुनावों में वह लगातार जीतकर संसद पहुंचे थे। जय प्रकाश अगर जीतते हैं, तो भी वह लगातार तीसरी बार एक ही क्षेत्र से सांसद नहीं होंगे। कुछ यही हाल ऊषा वर्मा के साथ भी है।