इस्टीमेट कमेटी के चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी ने बताया कि उन्होंने जल संसाधन मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है कि वे गंगा को तल से कैसे साफ करेंगे। गंगा में प्रदूषण दूर करने की उनकी योजना कितनी कारगर है, और कैसे सफल होगी। इस संबंध में विभाग की मंत्री उमा भारती से भी सवाल किया जाएगा।
डा. जोशी ने बताया कि पिछले दिनों जहाजरानी, भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की तरफ बनारस से गंगा में जहाज चलाने की योजना पर भी इस्टीमेट कमेटी ने सवाल खड़े किए हैं। कमेटी ने रिपोर्ट मांगी है कि गंगा में जल स्तर की कमी के चलते जहाज चलाना कहां तक संभव होगा। यदि नहीं, तो हवा-हवाई योजनाएं बनाना कहां तक उचित है।
केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना ने अभी तक गंगा सफाई और प्रदूषण दूर करने के लिए कितना काम किया है। इन सभी सवालों का जवाब कमेटी ने संबंधित मंत्रालयों से मांगा है। जरूरत पड़ने पर इनके मंत्रियों से भी सवाल-जवाब किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस्टीमेट कमेटी का फैसला केंद्र सरकार मानने को बाध्य तो नहीं है, लेकिन कमेटी को जब तक किसी योजना पर काम करने और उसके कारगर होने का ठोस लिखित जवाब नहीं मिल जाता, कमेटी बार बार सवाल उठाती रहेगी। यह केंद्र सरकार और उसके मंत्रालयों को देखना है कि वे जो भी योजनाएं जनता के लिए शुरू करना चाहते हैं, वे हवाई हैं या फिर पूरी भी होंगी।
ये है इस्टीमेट कमेटी
इस्टीमेट कमेटी केंद्र सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए होने वाले खर्चे का विवरण बनाती है। इसके बाद इसे संबंधित विभाग को सौंपा जाता है। इस्टीमेट कमेटी एक डिपार्टमेंट की तरह काम करती है, जिसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ होते हैं। यही कमेटी बाद में विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करती है।
बाबा रामदेव नहीं कमेटी दूर करेगी भ्रष्टाचार
डॉ. जोशी ने कहा कि कहने तो भ्रष्टाचार मिटाने की मुहिम में बाबा रामदेव लगे हैं, लेकिन असल भ्रष्टाचार तो केंद्र सरकार की इस्टीमेट कमेटी के जरिए दूर किया जा रहा है। इससे पहले भी रूरल डेवलपमेंट, टूजी, एयर इंडिया, कोल इंडिया में हुए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश उनके नेतृत्व में ही हुआ है। आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी।
इससे कोई समझौता नहीं होगा। डॉ. जोशी शुक्रवार को लोगों से मुलाकात के दौरान बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस्टीमेट कमेटी सभी मंत्रालयों की तरफ से किए जाने वाले कार्यों पर नजर रखती है। सभी मंत्रालयों को इसकी रिपोर्ट कमेटी को देनी पड़ती है। यदि कमेटी किसी योजना पर सवाल खड़े कर देती है, तो उसका ठोस जवाब मंत्रालय को देना पड़ेगा।