मानव जीवन तभी सार्थक है जब वह परमात्मा को जानने में अपनी ऊर्जा खत्म करे
क्योंकि भक्ति ज्ञान के बिना हम किसी से प्रेम नहीं कर सकते। परम ब्रम्ह
का दर्शन कर ही आत्मा का परमात्मा से मेल संभव है।
यह बात संत निरंकारी
सत्संग में अंतर्मुखी रामचंद्र शास्त्री ने कही। इस दौरान सेवादारों ने
सत्संग मेें आए लोगों की सेवा की।
रविवार को अकबरपुर मेें संत निरंकारी
सत्संग का आयोजन हुआ। इस दौरान सत्संग में मौजूद लोगों को आदर्श वचनों और
गुरुकृपा का महत्व आचार्य रामचंद्र शास्त्री ने बताया।
उन्होंने कहा कि
मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य परमात्मा को जानना होना चाहिए। बिना परमात्मा
के मानव जीवन तुक्ष्य है। वह एक भौतिक सुख में फंसा शरीर मात्र है।
आध्यात्म और गुरु को जाने बिना प्रेम संभव नहीं है। प्रेम ही मनुष्य को घर,
परिवार, समाज, नेकनीयती और आत्मीयता से जोड़ता है। हम सभी को प्रेम करना
सीखना होगा। फिर चाहे वह प्रेम मां-बाप, भाई-बहन, कर्तव्य, लक्ष्य, ईश्वर,
गुरु के प्रति क्यों न हो। प्रेम का उद्देश्य हमेशा सकारात्मक और
जनकल्याणकारी होना चाहिए।
स्वार्थ भाव से किया गया प्रेम कभी मनुष्य को
शांति नहीं दे सकता। कुछ पल के लिए उसे आनंद भूति अवश्य प्राप्त हो सकती
है। लेकिन यह अस्थायी है। स्थायी शांति तो ईश्वर व भगवान के प्रेम से ही
मिलती है। अगर हम मानव जीवन में परमात्मा को नहीं जान पाए तो हमें फिर से
84 लाख योनियों का चक्कर काटना पड़ेगा।
सत्संग समारोह में विजय शंकर,
जगन्नाथ, विनीत कुमार, अमित, विवेक, ओमजी, सुमित्रा, शांती, कुंती, ऋचा
मौजूद रहे।