केस-2
उन्नाव के चौधरी महादेव प्रसाद कॉलेज के छात्रों का परीक्षा केंद्र 70 किमी दूर एक्सिस कॉलेज, महाराजपुर, कानपुर में बना दिया है। काॅलेज संचालक का कहना है कि जियो टैगिंग के जरिये केंद्र बनाने में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।
कानपुर यह दो केस तो केवल बानगी भर है। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि और उनसे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में नौ दिसंबर से शुरू हो रहीं परीक्षाओं में केंद्र निर्धारण में भारी लापरवाही सामने आई है। यह हाल तब है जब केंद्रों का निर्धारण जियो टैगिंग के जरिए हुआ है। कॉलेज संचालक और छात्र परेशान हैं और गड़बड़ी को लेकर शिकायत कर रहे हैं। विवि प्रशासन के पास इस संबंध में अब तक 300 से अधिक आपत्तियां पहुंच चुकी हैं।
सीएसजेएमयू से संबद्ध कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया व इटावा स्थित 600 से अधिक महाविद्यालयों की विषम सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। विवि प्रशासन ने शनिवार देर रात 425 परीक्षा केंद्रों की सूची जारी की। परीक्षा केंद्र काफी दूरी पर पाकर कॉलेज संचालक परेशान हो गए। छात्रों की दिक्कतों से बचाने के लिए उन्होंने विवि प्रशासन से गुहार लगाई।
वहीं, कई कॉलेज ऐसे भी हैं जो परीक्षा केंद्र बनना नहीं चाहते हैं। इसके लिए उनके संचालकों ने भी विवि में आवेदन दिया है। उप्र स्ववित्तपोषित कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने प्रति कुलपति को पत्र लिखकर परीक्षा केंद्रों की सूची में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि यह छात्रों के साथ अन्याय होगा। इसमें सुधार की जरूरत है।
जियो टैगिंग में दूरी कम मगर बीच में गंगा
सूत्रों का कहना है कि जियो टैगिंग ठीक नहीं हुई है। टैगिंग के आधार पर किसी कॉलेज से दूसरे कॉलेज की एरियल दूरी तो कम दिखती है] लेकिन बीच में गंगा होने के कारण सड़क मार्ग से जाने पर यह दूरी बढ़ जाती है।
कॉलेज घबराएं नहीं। छात्रों और कॉलेजों की इन समस्याओं का जल्द ही समाधान होगा।
इन कॉलेजों में आईं शिकायतें
- निरंजन सिंह डिग्री कॉलेज, सफीपुर का परीक्षा केंद्र 65 किमी दूर शहीद भगत सिंह कॉलेज बिठूर, कानपुर।
- रामकली इकबाल बहादुर कॉलेज, सरसौल का परीक्षा केंद्र 75 किमी दूर एमवीएन कॉलेज बीघापुर उन्नाव।
- बाबू जयशंकर गया प्रसाद पीजी कॉलेज, सुमेरपुर का परीक्षा केंद्र 70 किमी दूर रामकली इकबाल बहादुर कॉलेज।
सड़क मार्ग से हुई है जियो टैगिंग
पीपीएन कॉलेज के प्रो. एस. चंद्रा ने एक अन्य प्रोफेसर के साथ मिलकर जियो टैगिंग कराई है। उन्होने बताया कि कॉलेज की लोकेशन चिन्हित करने सहित अन्य वजहों से विश्वविद्यालय ने जियो टैगिंग करवाई थी। जियो टैगिंग में एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज की दूरी को सड़क मार्ग से ली गई है। इनका एरियल डिस्टेंस नहीं लिया गया है। अगर जियो टैगिंग का इस्तेमाल करके केंद्र बनाए गए हैं तो दूरी गलत नहीं हो सकती है।
विवि से ऐसी गलती कैसे हो गई?
मंशा गलत या तकनीकी गड़बड़ी विश्वविद्यालय के पास कॉलेज और उनके आसपास की 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित कॉलेज का ब्योरा होता है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि विवि से ऐसी गलती कैसे हो गई? जब जियो टैगिंग में कॉलेजों के बीच की दूरी सड़क मार्ग से ली गई है तो परीक्षा केंद्र 70-70 किलोमीटर दूर कैसे बना दिए गए।
क्या किसी फायदे के लिए ऐसा किया गया?
कानपुर के कॉलेज का परीक्षा केंद्र उन्नाव में और उन्नाव के कॉलेज का परीक्षा केंद्र कानपुर में बनाने जैसी गलतियां जियो टैगिंग की वजह से कैसे हो सकती हैं?