मुस्लिम भाई पूरे 30 रोजे पर हमारे लिए इफ्तारी लेकर आते हैं। सुबह से ही फोन आते हैं कि पम्मी भाई सहरी कर लो। यह कहना है दादामियां चौराहे पर होलिका दहन के साथ हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देने वाले पम्मी गुप्ता का। अब उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी हर साल दादामियां चौराहे पर होली जलाती है।
दादामियां चौराहे पर 130 साल से होलिका का दहन हो रहा है। वर्षों पहले यहां शुरू हुई होलिका दहन की परंपरा का निर्वहन आज भी हो रहा है। यहां माहौल में प्यार और अपनापन नजर आता है। पम्मी के साथ उनके भाई अशोक कुमार, विजय भाटिया, वेद भाटिया, हाजी अब्दुल अंसारी, मो. अली, कासिम हसन, जाकिर हसन, शाहिद अजीज समेत आसपास के हिंदू-मुस्लिम होलिका दहन करते हैं। यह भाईचारा सिर्फ होली पर नहीं, बल्कि पूरे साल दिखता है। यही वजह है कि ईद मनाने इंग्लैंड से विजय भाटिया आते हैं। यहां जुलूस-ए-मोहम्मदी के लिए चंदा लेना हो या जलसे के लिए मंच बनाना हो तो हिंदू-मुस्लिम मिलकर तैयारी करते हैं।
क्षेत्र के अब्दुल हई ने बताया कि विजय भाटिया और उनका परिवार अब इंग्लैंड और जालंधर में शिफ्ट हो गया है, लेकिन वह हर साल होली, दिवाली और ईद-बकरीद पर जरूर आते हैं। जब वह आते हैं तो वह दिन भी ईद से कम नहीं होता। सभी उनसे मिलने जाते हैं। घर की महिलाएं उनके परिवार के लिए खाना बनाकर भेजती हैं। दिवाली के बाद वह शहर आए हैं। हम सभी उनके लिए गुझिया और सेंवई लेकर गए।
दुकानदार मो. सलीम अंसारी ने बताया कि यहां के सभी दुकानदार मुस्लिम हैं। क्षेत्र में हिंदू भाइयों की संख्या अब न के बराबर बची है, लेकिन हर त्योहार पर कुछ परिवार साथ हो जाते हैं। विशेषकर पम्मी गुप्ता का परिवार। होली, दिवाली, ईद, जुलूस-ए-मोहम्मदी साथ मिलकर मनाते हैं। ऐसा लगता ही नहीं कि होली, दिवाली हमारे त्योहार नहीं है। जिम्मेदारी के साथ होलिका दहन होता है। पूजा के समय सब साथ खड़े रहते हैं। एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की मुबारकबाद देते हैं।