‘मेरी ख्वाहिश है कि मैं फरिश्ता हो जाऊं। मां से इस तरह लिपट जाऊं कि फिर से बच्चा हो जाऊं।’ मुनव्वर राणा का यह शेर जहां अटूट तालियां बटोर लेता है। वहीं यहां पर मां को ठुकराने वाले बेटे भी मौजूद हैं। जिंदगी की सांझ ढली तो मां को घर से निकाल दिया गया। मां दर-दर के धक्के खाने को मजबूर है।
कानपुर के घाटमपुर कस्बा निवासी नन्हीं देवी (82) के सात बेटे और एक बेटी है। सभी की शादी हो चुकी और सभी संपन्न हैं। लेकिन बुढ़ापे में पति की मौत हुई तो बेटे रामप्रकाश, रामकुमार, राजेंद्र, राजेश, राकेश, रामबाबू और रवी ने मां को घर से निकाल फेंका। बेचारी मां बीते एक महीने से कानपुर रोड पर स्थित साईं मंदिर में पनाह लिए थी।
नन्हीं ने बताया कि पहले सभी बेटे एक-एक महीने उसको रखने की बात कह रहे थे। लेकिन वह भी नहीं किया। खाने पीने को मोहताज होने पर उसने एसडीएम के यहां प्रार्थनापत्र दिया। सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुलह अधिकारी संजय मेहता ने नन्हीं के छोटे बेटे रवी को बुलाकर उसके सुपुर्द कर दिया। साथ ही अन्य बेटों के नाम नोटिस जारी की गई है। एसडीएम सुखवीर सिंह ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनिमय के तहत वृद्धों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर उनका निस्तारण कराया जा रहा है।