मैं सीधे खड़ा नहीं हो पाता था। बोलने और समझने में भी दिक्कत होती थी। आम बच्चों की तरह मैं कभी खेल नहीं सकता था क्योंकि मुझे डिस्प्रेक्सिया की बीमारी थी। यह ऐसी बीमारी थी जिसने मुझे लोगों के बीच पागल साबित कर दिया था। बच्चे मेरा मजाक उड़ाते थे। कोई मेरे साथ नहीं खेलता था। शुक्रवार को एंटरप्रिन्योर हर्ष सोनगरा ने कुछ इसी अंदाज में अपनी कहानी बताई।
हर्ष विकट परिस्थितियों के बावजूद आज दुनिया में सबसे तेजी से उभरते हुए एंटरप्रिन्योर की सूची में शामिल हैं। वह कानपुर के होटल लिटिल शेफ में आयोजित टाई यूपी की आमसभा के फेस टू फेस कार्यक्रम को संबोधित करने आए थे। हर्ष ने बताया कि जब उन्हें और उनके परिजनों को मालूम चल गया कि दुनिया उन्हें स्वीकार नहीं करेगी तब उन्होंने यूट्यूब और इंटरनेट को अपना साथी बना लिया। यूट्यूब पर गेम बनाना और ऐप बनाना सीखा। 16 साल की उम्र थी जब पहला ऐप तैयार किया जिसे ‘माई चाइल्ड ऐप’ नाम दिया।
हर्ष ने बताया कि यह ऐप उन बच्चों के परिजनों के लिए था जो दूसरों से अलग थे। पैदा होते ही जिनके लक्षण असामान्य दिखते थे। इस ऐप में कई प्रश्न दिए गए हैं जिसका उत्तर देकर हर पैरेंट्स समझ सकता है कि उसके बच्चे को क्या बीमारी है। यही नहीं उस बीमारी के लिए ऐप में विशेषज्ञ डॉक्टरों के नाम और फिर उनसे अप्वाइनमेंट लेने का तरीका भी बताया गया है। अभी तक इस ऐप को देश के 10 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड कर लिया है। टाई यूपी की आमसभा में प्रेसिडेंट अमित तिवारी, उद्यमी गोपाल सूतवाला, राकेश सूरी, आरके अग्रवाल, टाई की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अंकिता द्विवेदी आदि मौजूद रहे।