तैयार हो रही भारतीयों के लिए खाने-पीने की गाइड लाइन
Sat, 28 Jul 2018 04:57 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
सार
- हाईकोर्ट के आदेश पर इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च करा रहा शोध
- कानपुर मेडिकल कालेज सहित 15 मेडिकल इंस्टीट्यूटों को मिली जिम्मेदारी
- मेडिकल कालेज की टीम राष्ट्रपति के गांव परौख से शुरू करेगी अपना शोध
हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीयों के खानपान की गाइड लाइन बनानी शुरू कर दी गई है। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने जीएसवीएम सहित देश के 15 नामचीन मेडिकल कालेजों को शोध और सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी है।
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इसके बाद तय होगा कि देशवासी क्या - क्या और कितना खाएं? ताकि वे न सिर्फ डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक से बचें, बल्कि ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ रहें। यह प्रोजेक्ट 15 माह में पूरा करना है। कानपुर में सर्वे की शुरुआत अगले महीने राष्ट्रपति के गांव परौख (कानपुर देहात) से होगी।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने पत्रकारों को बताया कि शोध का नाम ‘कंजम्शन पैटर्न आफ फूड एंड फूड प्रोडक्ट्स/ आइटम्स हाई इन फैट, साल्ट एं शुगर अमंग सिलेक्टेड सिटीस / टाउन एंड रूरल पापुलेशन इन इंडिया’ है। देश के कई हिस्सों में शोध को पांच एम्स सहित 15 मेडिकल कालेज/ इंस्टीट्यूट करेंगे।
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डेमो पिक
यूपी में शोध की जिम्मेदारी जीएसवीएम कालेज को मिली है। मेडिकल कालेज की टीम अपना शोध दो ब्लॉकों के चार हजार परिवारों पर करेगी। एक ब्लॉक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के गृह क्षेत्र ग्राम परौख झींझक ब्लाक (कानपुर देहात) है तो दूसरा नगर का घाटमपुर ब्लॉक।
इस शोध के लिए केंद्र ने मेडिकल कालेज को 53.68 लाख रुपये स्वीकृत किया है। पहली किस्त के रूप में 22.76 लाख रुपये मिल गए हैं। बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव की देखरेख में शोध सहायक, फील्ड वर्कर और मल्टी टास्किंग कर्मचारी घरों में जाकर सर्वे करेंगे।
ऐसे होगा सर्वे
डॉ. यशवंत राव ने बताया कि शोध में छह साल से ज्यादा उम्र के बच्चे से लेकर वृद्धों तक को शामिल किया जाएगा। उन सबकी उम्र, वजन, छाती की माप लेकर बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) तैयार करेंगे। सभी के ब्लड प्रेशर जांचने के साथ ही ब्लड सैंपल लेकर हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ न्यूट्रीशन (एनआईएन) से लिपिड प्रोफाइल, शुगर की जांच कराई जाएगी। वे आसपास की जिस दुकान से फास्ट फूड, समोसे, मिर्ठाई आदि लेकर खाते होंगे, उनके नमूने लेकर जांच के लिए हैदराबाद भेजा जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि कितने लोग कुपोषित, कितने मोटे और कितने ज्यादा वजन के हैं। वे क्या - क्या और कितनी मात्रा में खा रहे हैं। इन खाद्य पदार्थों में और घरों में बन रहे खाने में कितना नमक, शक्कर, फैट, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन आदि है। शोध के बाद पता चलेगा कि अलग - अलग उम्र के लोगों को औसतन क्या - क्या और कितनी मात्रा में खाना चाहिए? अभी वे क्या - क्या कितना - कितना खा रहे हैं? इसके परिणाम? आदि का पता चलेगा। देशभर के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले इस शोध के आधार पर देश में खानपान की गाइड लाइन तैयार की जाएगी।
देश में नहीं है खानपान की गाइड लाइन
डॉ. राव के मुताबिक सन् 2010 में उदय फाउंडेशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल कर पता लगाने की कोशिश की कि हम जो खाना खाते हैं, उसकी गुणवत्ता क्या है और उसमें शुगर, फैट, नमक कितना है। हाईकोर्ट के आदेश पर यह सर्वे किया जा रहा है। डॉ. प्रशांत त्रिपाठी ने बताया कि सर्वे 6 से 12 वर्ष, 13 से 18 वर्ष और उससे ज्यादा उन्हें के लोगों की श्रेणियां बनाकर किया जाएगा। यह तीन आधार पर किया जा रहा है। इनमें हमारे खाने की गुणवत्ता? हम कैसा खा रहे हैं? हमें कैसा खाना खाना चाहिए? शामिल हैं।
एक चम्मच से ज्यादा नमक बढ़ा रहा हाईपरटेंशन
कानपुर। रोज एक चम्मच से ज्यादा नमक खाने से हाईपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के रोगी बढ़ रहा है। इसी रह 20 ग्राम से ज्यादा शक्कर और इससे ज्यादा मात्रा में फैट खाने से शुगर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक के मरीज बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार 24 घंटे में औसतन 5 ग्राम नमक, 20 ग्राम शक्कर, 10 से 20 ग्राम फैट और जितना वजन हो, उतने ग्राम प्रोटीन रोज खाने में शामिल होना चाहिए।
शुगर फ्री गोलियां हैं खतरनाक
मेडिकल कालेज प्राचार्य के अनुसार शुगर फ्री गोलियों में एस्पार्टिन नामक रसायन मिलाया जाता है। इस रसायन से कैंसर की आशंका रहती है। कोल्ड ड्रिंक में शुगर की तुलना में उससे 200 गुना ज्यादा मिठास के लिए भी यही रसायन मिलाया जाता है। इसलिए कोल्डड्रिंक भी बहुत ज्यादा पीने से कैंसर हो सकता है। अत्यधिक कोल्डड्रिंक, फास्ट फूड, जंक फूड से बच्चों में डायबिटीज बढ़ रही है। 10 साल के बच्चों की नसों में चर्बी जमने लगती है, जो उनकी युवावस्था में हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक की वजह बन रही हैं।