टीले में गुफा बनाने में जुट गए
उन्होंने बताया कि पिता के निधन के बाद शाहाबाद क्षेत्र के एक चुनाव में भाग लिया। इसमें निराशा हाथ लगी। मां औश्र अन्य सदस्य पैतृक घर में ही रहते हैं, लेकिन साल 2011 से फकीरी के जीवन में कदम रख लिया। घर-परिवार छोड़कर निर्जन स्थान पर इसी टीले में गुफा बनाने में जुट गए, जो अब एक महल की तरह बनकर तैयार हो गया।
दूर-दूर से आ रहे हैं लोग
12 साल की मेहनत से मिट्टी के ऊंचे टीला को काट-काटकर बेसमेंट सहित दो मंजिला गुफा के अंदर महल नुमा मकान बना दिया है। 11 कमरों के इस महल में बैठक, रसोई कक्ष के साथ ही इबादत के लिए मस्जिद भी बनाई है। गैलरी में नक्काशी बनाई है। इसको देखने से दूर-दूर से लोग आ रहे हैं।