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लॉकडाउन में अफसरों से नाराज ग्रामीणों ने लिखी नई इबारत, चार दिन में नदी पर बना दिया पुल

Sat, 09 May 2020 10:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
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चार दिन में ग्रामीणों ने तैयार किया पुल - फोटो : amar ujala
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हरदोई के बघौली क्षेत्र में  प्रशासनिक अफसरों और जनप्रतिनिधियों से निराश ग्रामीणों ने लॉकडाउन में एक नई इबारत लिख डाली। आपसी सहयोग से अहिरोरी विकास खंड के ग्राम मसीत व आस-पास के गांवों के लोगों ने सई नदी पर कच्चा पुल तैयार कर लिया।
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सई नदी पर इस पुल का निर्माण हो जाने से आस-पास के लगभग 50 गांवों के कई हजार ग्रामीणों को हरदोई-लखनऊ मार्ग पहुंचने के लिए महज तीन किलोमीटर ही अतिरिक्त चलना होगा। पुल न होने के कारण ग्रामीणों को तकरीबन 10 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ता था।

अहिरोरी विकास खंड में बर्रा डाल सिंह-अहिरोरी मार्ग पर सई नदी है। इस नदी पर कोई पुल नहीं था। कुछ वर्ष पहले करीमनगर सैदापुर व बल्लीपुर के कुछ संभ्रांत लोगों ने अपने स्तर से यहां हृयूम पाइप डलवा दिए थे। कुछ दिन तक जैसे तैसे इस पर आवागमन हो सका, लेकिन फिर स्थिति पुरानी वाली हो गई और लोगों को आवागमन में परेशानी होने लगी।
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दरअसल सई नदी पर पुल न होने के कारण मसीत, करीमनगर सैदापुर, केशवन, कैनखेड़ा, रामनगरिया, सैदापुर, काईमऊ, बर्रा डाल सिंह आदि गांवों के लोगों को हरदोई-लखनऊ मार्ग पर पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर का अतिरिक्त फेर लगाना पड़ता था। लॉकडाउन के दौरान घरों में रह रहे ग्रामीणों ने समस्या का हल निकालने की चर्चा शुरू की और फिर सई नदी पर कच्चा पुल बनाकर तैयार कर लिया।
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पुल के निर्माण में सहयोग करते ग्रामीण - फोटो : amar ujala
चार दिन में बना डाला 18 मीटर लंबा पुल 
ग्रामीणों का दावा है कि बीते मंगलवार से उन लोगों ने मिलकर पुल बनाने का कार्य शुरू किया था। शुक्रवार देर शाम पुल निर्माण का कार्य पूरा हो गया। पुल की लंबाई लगभग 18 मीटर है। इसमें तकरीबन चार हजार बोरियों के अलावा मिट्टी, हृयूम पाइप, बांस, लकड़ी का इस्तेमाल भी किया गया है। लगभग आधा सैकड़ा ग्रामीणों ने पुल के निर्माण में मजदूरी भी की और अपने आवागमन के लिए रास्ता सुलभ किया। निर्माण के दौरान जेसीबी की जरूरत भी पड़ी तो इसकी व्यवस्था मसीत के प्रधान रईस अहमद ने की।

बोरी खरीदने के लिए ग्रामीणों ने आपस में किया चंदा 
बोरी खरीदने के लिए ग्रामीणों ने आपस में चंदा भी किया। जिसकी जैसी सामर्थ्य थी वैसा सहयोग किया गया। किसी ने पांच सौ रुपये दिए तो किसी ने एक हजार रुपये और किसी ने सहयोग के लिए कार्य में ही मजदूरी भी की। ग्रामीणों का दावा है कि लगभग 40 हजार रुपये में पुल का निर्माण पूरा कर लिया। सहयोग करने वालों में पंकज शर्मा, पिंटू सिंह, छुन्ना सिंह, सूरज सिंह आदि लोग शामिल हैं।

यह थी पुल के निर्माण की सरकारी अड़चन
लोक निर्माण विभाग के नोडल अधिकारी वीरेंद्र चौधरी से जब इस बावत जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि यह सही है कि कई बार ग्रामीणों ने वहां पर पुल का निर्माण कराने की मांग की, लेकिन नियमावली के चलते पुल बनाना संभव नहीं था। नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में 10-10 किलोमीटर की दूरी पर पुल का निर्माण नहीं कराया जा सकता। संबंधित स्थान से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर सई नदी पर ही एक पुल बना हुआ है।
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