ईंट-भट्ठे पर पथाई करने वाले मजदूरों को पहले से ही खोज लिया जाता है। अमूमन ठेकेदार के माध्यम से हर वर्ष वही मजदूर बुलाए जाते हैं। पिछले कई वर्ष से इरशाद इसी भट्ठे पर पथाई करने परिवार समेत आता है। इस बार पथाई का काम उसे जिंदगी भर का गम दे गया।
घटनास्थल पर एकत्रित परिजन और लोग
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पथाई के दौरान गीली की जाती है मिट्टी
उपजिलाधिकारी शाहाबाद सुशील मिश्रा ने बताया कि घटना का पता चलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर भेजी गई थी। इस दौरान पता चला कि पथाई के दौरान मिट्टी गीली की जाती है। इसके लिए मजदूरों को दूर न जाना पड़े इसलिए पास में ही पांच फीट गहरा गड्ढा खोदकर पानी भर दिया गया था।
राहत कोष से चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे
रविवार को दिन में यहां मजदूरों ने काम भी किया था। रात में हादसे का पता चला। एसडीएम ने बताया कि दोनों मृतकों के परिजनाें को दैवीय आपदा राहत कोष से चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे। दोनों सगे भाई बहन हैं इसलिए इनके परिजनों के खाते में रुपये भेज दिए जाएंगे।
भट्ठे पर खोदा गया गड्ढा बना काल
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ये था पूरा मामला
लोनार कोतवाली क्षेत्र के चिमना में स्थित ईंट-भट्ठे के पास पानी भरे गड्ढे में डूब रहे भाई को बहन न बचा सकी। दोनों मासूमों की मौत हो गई। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जरूरी नमूने जुटाए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबकर मौत होने की पुष्टि हुई है।
भट्ठे के पास खेल रहे थे दोनों
लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी कोतवाली क्षेत्र के अमीनगर के इरशाद चिमना गांव में स्थित आशीष ईंट-भट्ठे पर पथाई का काम करते हैं। ईंट-भट्ठा परिसर में ही बने झोपड़ीनुमा मकान में वह पत्नी सलमा, दो बेटों और तीन बेटियों के साथ रहते हैं। रविवार शाम उनकी बेटी रुखसार (9) और अबजद (7) भट्ठे के पास खेल रहे थे।
पानी भरे गड्ढे में शव मिले
इरशाद ने बताया कि देर रात तक बच्चे घर नहीं आए, तो दोनों की तलाश की गई। इस दौरान भट्ठे से लगभग 100 मीटर दूर पानी भरे गड्ढे में दोनों के शव मिले। कुछ ही देर में भीड़ लग गई। सीओ हरपालपुर सतेंद्र सिंह ने बताया कि परिजनों ने कोई आरोप नहीं लगाया है।
एक-दूसरे को पकड़े हुए थे दोनों
माना जा रहा है कि खेलते समय अबजद पानी भरे गड़्ढे में गिर गया। जब वह डूबने लगा तो बहन रुखसार ने उसे हाथ से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान वह भी पानी में गिर गईं। इसके बाद दोनों बच्चे डूब गए। जब दोनों बच्चों के शव निकले, तो इनके हाथ एक दूसरे के हाथों में थे।