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नहीं भूले यारी, कैमरा देख पूर्व इंस्पेक्टर को पकड़ाई हथकड़ी

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कानपुर देहात। कानपुर चकेरी में बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी पूर्व इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी के साथ खाकी का याराना कम नहीं हो रहा है। यह तब है जब दो दिन पहले इसी मामले में पुलिस कमिश्नर जांच बैठा चुके हैं।
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शनिवार को एक बार फिर कानपुर कारागार से पूर्व इंस्पेक्टर को माती कोर्ट लाया गया। कोर्ट से बाहर निकलते समय मीडिया कर्मियों व कैमरा मैन को देख साथ चल रहे पुलिस कर्मियों ने आरोपी पूर्व इंस्पेक्टर को हथकड़ी पकड़ा दी। इसकी कोर्ट परिसर में दिन भर चर्चा होती रही।
अकबरपुर कोतवाली में वर्ष 2013 में तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी ने हत्या और लूट की वारदात के केस में विवेचना की थी। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है। शनिवार को उसे बहस के लिए कोर्ट बुलाया गया था।
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इस पर पुलिस वाहन से पूर्व इंस्पेक्टर को गुपचुप तरीके से कोर्ट लाया गया। सुनवाई के बाद पूर्व इंस्पेक्टर जब कोर्ट से बाहर निकला तो वहां मीडिया कर्मी व कैमरा मैन खड़े नजर आए। इस पर साथ चल रहे सिपाहियों ने हथकड़ी पूर्व इंस्पेक्टर के हाथ में थमा कर खानापूरी करने का प्रयास किया।
सुरक्षा के नाम पर भी सिर्फ दो सिपाही ही साथ में दिखाई दिए। इसके बाद बाहर खड़ी पुलिस की जीप में बैठाकर उसे वापस ले जाया गया। बता दें कि 19 अगस्त को दो सिपाही पूर्व इंस्पेक्टर को कानपुर से सुनवाई के लिए एक इनोवा से लेकर आए थे और सिपाही हथकड़ी पॉलीथिन में डालकर घूमता रहा था।
इसकी खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने मामले की जांच एडीसीपी पुलिस लाइन बसंत लाल को सौंपते हुए तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी थी। जो अभी चल रही है।
जिरह के दौरान दिए गोलमोल जवाब
आरोपी पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र ने बताया कि मुकदमे के नामजद आरोपियों को हटाकर अन्य के नाम शामिल करने को लेकर पूर्व इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी से सवाल पूछे गए थे। इस पर वह सीधे जवाब देने के बजाय घुमाते रहे।
वहीं सहायक शासकीय अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि पूर्व इंस्पेक्टर ने केस से संबंधित सवाल पूछने की बात कही थी। फिलहाल अब सुनवाई की अगली तारीख 24 अगस्त दी गई है।
हथकड़ी थमाने पर बोले विधि विशेषज्ञ
वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बंदी के आचरण व परिस्थितियों को देखते हुए उसके पुलिस अभिरक्षा से भाग जाने, लोकशांति भंग या हिंसा करने की आशंका है तो उसे हथकड़ी लगाई जा सकती है।
बिना किसी कारण के किसी व्यक्ति को हथकड़ी लगाया जाना उसके मूल अधिकार का हनन माना जाता है। उन्होंने बताया कि बंदी को हथकड़ी पकड़ाने जैसा किसी तरह का नियम नहीं है।
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