मां ने लगाया था हत्या का आरोप
एक लाख रुपये नगद व मोटरसाइकिल की मांग करके उसे प्रताड़ित किया करते थे। पुलिस को दी गई सूचना में बताया कि उसकी पुत्री ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उसकी हत्या की गई है। उक्त घटना में पति शिवपूजन पाल के अलावा ससुर रामसेवक, सास रजुलिया, जेठ अजयपाल, जेठानी आरती, देवर हरीपूजन व ननद सुनीता पर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच पड़ताल की।
आरोपी पति दोषी करार, 10 साल का कारावास
विवेचक ने जेठ, जेठानी, देवर व ननद के नाम पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर पति व सास-ससुर के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। जिला न्यायाधीश की अदालत ने सुनवाई के दौरान साक्ष्य व गवाहों के आधार पर फैसला सुनाया है। सास व ससुर को दोष मुक्त करते हुए पति को दोषी करार दिया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 498 ए में दो साल की सजा व दो हजार जुर्माना लगाया है। धारा चार में एक साल की सजा के साथ एक हजार के अर्थदंड से दंडित किया है।