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10 बजे पहुंची छात्रा, मिन्नतें भी रहीं नाकाम
नियमों के मुताबिक परीक्षा केंद्र में प्रवेश की समय सीमा सुबह आठ बजे समाप्त हो चुकी थी। जब मां-बेटी थक-हारकर 10 बजे के बाद केंद्र पर पहुंचीं, तो केंद्र प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए गेट खोलने और प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद बेबस मां-बेटी ने राहत पाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर भी लगाए, लेकिन कोई मदद नहीं मिल सकी।
मां बोली- मुझे मेरी बेटी का भविष्य चाहिए
परीक्षा केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भावुक कर देने वाला था। वर्षों की मेहनत पर पानी फिरता देख मां अनुराधा के आंसू छलक पड़े। रोते हुए मां ने सिर्फ एक ही गुहार लगाई कि मुझे और कुछ नहीं, बस मेरी बेटी का भविष्य चाहिए। हालांकि, नियमों की बंदिशों के आगे किसी की न चली और आखिरकार मां-बेटी को बेहद मायूस होकर वापस कानपुर लौटना पड़ा।