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हमीरपुर: रपटा पार करते समय बहा बेटा, बचाने नदी में कूद गया पिता, 20 घंटे बाद झाड़ियों में मिला शव, परिजन बेहाल

Sun, 13 Sep 2026 12:17 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

Hamirpur News: मौदहा कस्बे में श्यामनाला नदी पार करते समय 12 वर्षीय बेटे का पैर फिसलने पर उसे बचाने नदी में कूदा पिता खुद तेज बहाव में बह गया। पिता ने अपनी जान पर खेलकर बेटे को तो सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन 20 घंटे बाद रविवार को घटनास्थल से 500 मीटर दूर झाड़ियों में उसका शव मिला।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस और ग्रामीणों की भीड़ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे में श्यामनाला नदी में बेटे को बचाने के लिए कूदे चरवाहे का शव करीब 20 घंटे बाद रविवार को घटनास्थल से 500 मीटर दूर झाड़ियों में फंसा मिला। शनिवार दोपहर रपटा पार करते समय उसका 12 वर्षीय बेटा तेज बहाव में बहने लगा था। पिता ने नदी में छलांग लगाकर बेटे को तो बचा लिया, लेकिन खुद तेज बहाव में बह गया था। शव मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया।

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कोतवाली क्षेत्र के उरदना गांव निवासी रामकिशोर उर्फ डगरु शनिवार दोपहर अपने 12 वर्षीय बेटे मोहित के साथ श्यामनाला नदी किनारे बकरियां चराने गए थे। पिता-पुत्र नदी में बने रपटा को पार कर रहे थे। इसी दौरान अचानक मोहित का पैर फिसल गया और वह नदी के तेज बहाव में बहने लगा। बेटे को बहता देख रामकिशोर ने रपटे से नदी में छलांग लगा दी।

बेटे को सुरक्षित बाहर निकाला
उन्होंने किसी तरह बेटे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन खुद पानी के तेज बहाव में बह गए। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी करनवीर सिंह और क्षेत्राधिकारी राजकुमार पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एनडीआरएफ की टीम ने ग्रामीणों के साथ शनिवार देर रात तक नदी में रामकिशोर की तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला।

झाड़ियों में फंसा मिला रामकिशोर का शव
रविवार सुबह एनडीआरएफ की टीम ने फिर से खोज अभियान शुरू किया। करीब 10 बजे रपटे से लगभग 500 मीटर दूर झाड़ियों में रामकिशोर का शव फंसा मिला। पुलिस ने शव को नदी से बाहर निकलवाकर कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। तहसीलदार धनंजय कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
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डेढ़ बीघा जमीन, मजदूरी कर चलाता था परिवार
ग्राम प्रधान प्रभात यादव ने बताया कि रामकिशोर के दो बेटे और एक 18 वर्षीय बेटी है। उसके हिस्से में करीब डेढ़ बीघा जमीन थी। परिवार के भरण-पोषण के लिए वह गांव में मजदूरी और चरवाही का काम करता था। हादसे के बाद पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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