मामले में पुलिस ने छेड़खानी, भद्दे इशारे करने, पीछा करने व लज्जा का अनादर करने के लिए अपशब्द बोलने का मुकदमा दर्ज किया था। इस पर सुनवाई करते हुए सिविल जज जूनियर डिवीजन आयुषी चतुर्वेदी ने उक्त सभी आरोपों में मोहम्मद हारून को दोषी माना। तीन वर्ष से अधिक सजा होने के कारण धारा 325 के तहत पत्रावली सीजेएम को भेज दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार शासन ने दोषी को चार वर्ष कारावास की सजा के साथ साढ़े चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया।