प्रदेश में गैंगेज डॉल्फिन गणना का शुभारंभ सोमवार को प्रमुख सचिव वन संजीव सरन ने गंगा बैराज पर किया। गणना तो शुरू हो गई लेकिन डॉल्फिन संरक्षण के लिए प्रदेश में कोई इंतजाम नहीं है।
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो इसी तरह नदियों का प्रदूषण बना रहा तो जल्द ही यह प्रजाति विलुप्त हो जाएगी। संरक्षण के बारे में पूछने पर प्रमुख सचिव भी कोई जवाब नहीं दे पाए।
विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यू डब्ल्यू एफ) और वन विभाग सामूहिक रूप से प्रदेश की नदियों में गैंगेज डॉल्फिन की गणना कर रहे हैं। गंगा बैराज पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव वन संजीव सरन ने कहा कि डॉल्फिन की उपस्थिति से ही नदी के पानी की शुद्धता का पता चलता है।
जल प्रदूषण के चलते इनकी संख्या तेजी से घटती जा रही है। डीएम कौशल राज शर्मा ने भी टेनरी संचालकों आदि से नदियों में प्रदूषण रोकने की अपील की। वर्ल्ड वाइड फंड के प्रदेश संयोजक डॉ. सुरेश ने बताया कि नौ स्थानों पर 21 टीमों ने गणना शुरू कर दी है। बाद में प्रमुख सचिव ने हरी झंडी दिखाते हुए बैराज से फतेहपुर तक की गणना के लिए टीम को रवाना किया। बताया कि अब यह गणना हर साल होगी।
हालांकि गैंगेज डॉल्फिन के संरक्षण के मुद्दे पर वे चुप्पी साथ गए। इस मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी अतुलकांत शुक्ल, प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा, डीएफओ रामकुमार, चिड़ियाघर निदेशक दीपक कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड टीयू खान मौजूद रहे।