छात्र का दावा है कि वह 13 वर्ष की उम्र से कोडिंग कर रहा है और पारंपरिक इंजीनियरिंग को छोड़कर इस क्षेत्र को चुना। उसने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ सीटें खाली रहने के बावजूद चयन मानदंड स्पष्ट नहीं है। वेबसाइट में सेंध लगने पर ऑनलाइन बहस भी छेड़ गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और रेडिट पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट में संस्थान के पोर्टल पर लिखा मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। छात्र ने दावा किया कि उसका उद्देश्य किसी प्रकार की क्षति पहुंचाना नहीं बल्कि प्रशासन और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना था।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे आवेदक की प्रतिभा का प्रमाण मान रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे कौशल को अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर कई यूजर्स का मानना है कि बिना अनुमति किसी संस्थान के सिस्टम में घुसपैठ करना कानूनन गलत है और इसे किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।
पूर्व अनुभव न होने की वजह से छात्र को शाॅर्टलिस्ट नहीं किया गया था लेकिन हमारा काम ऐसी प्रतिभाओं को निखारना है। इस कारण छात्र को एक मौका देने की तैयारी कर रहे हैं। इस सत्र की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, अब अगले सत्र में वह आवेदन करेगा तो उसे मौका दिया जाएगा। - प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी कानपुर