उन्होंने कहा कि वेद, पुराण, रामायण, गीता, कुरान में लोक कल्याण की बातें कही गई हैं। संत-महात्मा सभी के लोक कल्याण की कामना करते हैं। मनुष्यता सबसे बड़ी चीज है। सब कुछ मिट्टी से निर्मित है और मिट्टी में ही समाहित हो जाता है।
सभी को आत्मा का ज्ञान होना चाहिए और यह तभी संभव होता है, जब मनुष्य भक्तिभाव से जुड़ता है। शंकराचार्य ने कहा कि विश्व में बढ़ रहे युद्धों के कारण प्रकृति का संतुलन गड़बड़ा गया है। प्रकृति को बचाने के लिए युद्धों को रोकना बेहद जरूरी है।
सभी को मर्यादा में रहकर निष्ठा के साथ सामाजिक संस्कृति का निर्वहन करना चाहिए। इससे ही सद्भाव उत्पन्न होगा और खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि इंगोहटा में हो रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ से जनकल्याण होगा और भविष्य में इसके परिणाम क्षेत्रवासियों को अवश्य प्राप्त होंगे।