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Hardoi: जीएसटी की एसआईबी टीम का प्लाईवुड फैक्टरी पर छापा, 67 लाख का माल सीज

Thu, 29 Feb 2024 11:27 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
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जीएसटी की एसआईबी टीम का प्लाईवुड फैक्टरी में छापा - फोटो : अमर उजाला
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जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा की लखनऊ से आई टीम ने बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र में प्रतापनगर चौराहा के पास स्थित प्लाईवुड फैक्टरी पर छापा मारा। तकरीबन 34 घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान टीम ने 67 लाख रुपये के लकड़ी के बोटे व इससे जुड़ी अन्य सामग्री सीज कर दी। बड़े पैमाने पर कर चोरी की बात छापे के दौरान टीम को पता चली है। मौके पर लकड़ी की खरीद और प्लाईवुड की बिक्री से जुड़े अभिलेख भी नहीं मिले।
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जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा के संयुक्त आयुक्त अरुण शंकर राय के निर्देश पर विभाग की टीम ने प्रतापनगर चौराहा के पास सुखईपुरवा में स्थित पार्टिकल रोड इंडस्ट्री पर छापा डाला। यहां प्लाईवुड बनाई जाती है। इसके मालिक बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के झरोइया निवासी जाकिर हुसैन हैं। बुधवार को दिन में 11 बजे पहुंची टीम ने अभिलेखों से लेकर कंप्यूटर और लैपटॉप तक खंगाले। इस दौरान जाकिर हुसैन और मौके पर मौजूद मिले स्टाफ से भी अभिलेख मांगे गए, लेकिन खरीद और बिक्री से संबंधित अभिलेख यह लोग नहीं दिखा पाए। संयुक्त आयुक्त अरुण शंकर राय ने बताया कि तकरीबन 67 लाख रुपये के लकड़ी के बोटे और इससे जुड़ी अन्य सामग्री सीज कर दी गई है।

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लकड़ी की खरीद फरोख्त से जुड़ा मंडी शुल्क का कोई अभिलेख भी नहीं मिला है। मौके पर मिले अभिलेखों का लेख पुस्तिका से मिलान किया जाएगा। इसी आधार पर तय होगा कि कितने की कर चोरी की गई है। संयुक्त आयुक्त ने कहा कि यह स्पष्ट है कि फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर कर चोरी हुई है। छापा डालने वाली टीम में उपायुक्त विजय पाल सिंह, सहायक आयुक्त अरविंद कुमार सिंह और विशाल सिंह, सचल दल के उपायुक्त पवन कुमार और राजीव मिश्रा भी शामिल रहे। पूरे मामले पर जाकिर हुसैन ने कहा कि जांच करना और छापा डालना अधिकारियों का काम है। इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
 
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बिना बिजली कनेक्शन चल रही थी प्लाईवुड फैक्टरी
जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा की टीम ने जब फैक्टरी पर छापा मारा और कोने-कोने की जांच की तो चौकाने वाली बात सामने आई। दरअसल इतनी बड़ी प्लाईवुड फैक्टरी को चलाने के लिए बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। जब इसको लेकर टीम में शामिल अधिकारियों ने सवाल किया तो कर्मचारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जनरेटर चलाकर प्लाईवुड फैक्टरी चलाई जाती है। हालांकि जिस क्षमता का जनरेटर लगा था उससे पूरी प्लाईवुड फैक्टरी चलाया जाना संभव ही नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों की भी मिलीभगत इस फैक्टरी के बिना कनेक्शन संचालन में है।

मौके पर मिलीं 500 से अधिक तौल पर्चियां, भुगतान का कोई रिकॉर्ड नहीं
प्लाईवुड बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी एक धर्मकांटों से तौल करवाकर लाई जाती है। विशेष अनुसंधान शाखा की टीम को परिसर में 500 से अधिक पर्चियां मिली हैं, लेकिन इनके भुगतान और खरीद संबंधी कोई अभिलेख नहीं मिले हैं। इसकी भी जांच टीम ने शुरू की है। बड़ी संख्या में अभिलेख टीम अपने साथ ले गई है।
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