बेहटा-मदनपुर उपकेंद्र का पांच वर्षों से नहीं खुला ताला
बेहटा-मदनपुर में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र भी देखरेख के अभाव में जर्जर हो गया है। एएनएम गांव में बैठने लगीं तो गांव वालों ने इसके मुख्य गेट पर खूंटे गाड़कर मवेशी बांधना शुरू कर दिया। केंद्र के अंदर से बाहर तक गंदगी का अंबार है तो झाड़ियां भी उग आई हैं। डॉक्टर यहां झांकने नहीं आते। एएनएम भी जहां तहां बैठकर सरकार की आंखों में धूल झोंक रही हैं। गांव में कोई बीमार होता है तो उसे पतारा या घाटमपुर आना पड़ता है।
रावतपुर चौधरियान में नशेबाजों का अड्डा बना अस्पताल
रावतपुर चौधरियान में बना उपकेंद्र खंडहर होने के साथ अब नशेबाजों का अड्डा बन गया है। उपकेंद्र भवन के आगे झाड़ियों का अंबार लगा है। गांव वाले बताते हैं कि स्वास्थ्य उपकेंद्र में शाम से लेकर देररात तक शराब और गांजा का दौर चलता रहता है। यहां कई सालों से कोई डॉक्टर नहीं आया। किसी जनप्रतिनिधि ने इसे चालू कराने के प्रयास भी नहीं किए।
उप स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम की तैनाती का मुख्य उद्देश्य है कि टीकाकरण में ग्रामीणों को दूरदराज न जाना पड़े। एएनएम बुखार के मरीजों को दवा वितरित नहीं करती हैं। बुखार पीड़ित मरीज का पीएचसी या सीएचसी में उपचार होगा। अभी हाल ही आया हूं। भीतरगांव ब्लॉक के उप स्वास्थ्य केंद्रों के खंडहर में तब्दील होने की जानकारी नहीं है। सभी सेंटरों की साफ-सफाई कराकर सुचारु रूप से चालू कराने का प्रयास करता हूं।
डॉ. नेपाल सिंह, सीएमओ कानपुर