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ग्राउंड रिपोर्ट: गांवों में संक्रमण फैला तो बिना इलाज तड़पकर मरे लोग, खंडहर हैं 48 स्वास्थ्य उपकेंद्र

Sun, 16 May 2021 12:27 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर (घाटमपुर/भीतरगांव)

सार

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल कागजों में भले ही दुरुस्त हो पर असल में कुछ और ही है। कोरोना काल के दौरान बिना इलाज के गांवाें में लोग मर रहे हैं। जहां लोगों को इलाज मिलता वह जगह या तो खंडहर य नशेबाजी के अड्डे में तब्दील हो गई है। पढ़िए अमर उजाला की खास रिपोर्ट...
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कानपुर के भैरव घाट की दिल दहला देने वाली तस्वीर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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गांव-गांव फैले कोरोना संक्रमण और बुखार से एक महीने में सैकड़ों मरीजों की इलाज के अभाव में जान चली गई। दर्जनों परिवारों में कमाने वाले युवा चल बसे, तो कई परिवारों में माता-पिता की मौत से बच्चे अनाथ हो गए। प्रदेश सरकार ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का दावा करती जरूर है, मगर ब्लॉक से जिले तक के अफसरों की लापरवाही, विधायक और सांसदों की अनदेखी के चलते कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के 48 गांवों में करोड़ों की लागत से बने स्वास्थ्य उपकेंद्र खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।
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मुख्य गेट पर लगा ताला वर्षों से नहीं खुला। इन केंद्रों के अंदर झाड़ियां उग आईं हैं। कुछ केंद्र तो जुआ खेलने का अड्डा बन चुके हैं। ग्रामीण बताते हैं कि रात में इन केंद्रों के अंदर से अक्सर डरावनी आवाजें आती हैं। टीकाकरण के लिए एएनएम गांव के पंचायत भवनों में बैठने को मजबूर हैं। बानगी के तौर पर कुछ स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत जिले के माननीयों और आला अधिकारियों के सामने पेश है। शायद पहले किसी ने इसके हालात देखे सुने होते तो मौतों के आंकड़ों में जरूर कुछ कमी आई होती। 

13 साल से बंद नेवादा-भरथुवा का स्वास्थ्य उपकेंद्र
ग्राम पंचायत महोलिया के मजरा नेवादा-भरथुवा गांव में वर्ष-2007 में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र वर्ष-2008 से बंद है। जर्जर इमारत के भीतर और बाहर उगी झाड़ियां इसकी गवाही देती हैं कि इसे संचालित करने की मंशा कभी नहीं दिखी। गांव के पूर्व प्रधान पति रामबाबू बताते हैं कि बीते पांच साल के कार्यकाल में केंद्र में लोहे के तीन दरवाजे, खिड़कियां, टाइल्स लगवाकर भवन चकाचक करा दिया गया था। इसके बाद भी कोई डॉक्टर या एएनएम यहां नहीं बैठे। बस बिल्डिंग बनवाने के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट हो रही है।
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उमरी उपकेंद्र में कभी नहीं बैठी स्वास्थ्य टीम
ग्राम पंचायत ऊमरी में स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों और छतों में दरारें आ गई हैं। जगह-जगह घास उग आई है। खिड़कियां, दरवाजे व फर्श भी टूट गया है। खंडहर में तब्दील इस केंद्र में डॉक्टर तो दूर की बात, कभी भी एएनएम तक नहीं बैठी। गांव वाले बताते हैं कि कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जर्जर केंद्र दिखाकर मरम्मत की मांग की गई पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब गांव वाले लकड़ी और कंडा भरते हैं।
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कोरोना से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala
बेहटा-मदनपुर उपकेंद्र का पांच वर्षों से नहीं खुला ताला
बेहटा-मदनपुर में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र भी देखरेख के अभाव में जर्जर हो गया है। एएनएम गांव में बैठने लगीं तो गांव वालों ने इसके मुख्य गेट पर खूंटे गाड़कर मवेशी बांधना शुरू कर दिया। केंद्र के अंदर से बाहर तक गंदगी का अंबार है तो झाड़ियां भी उग आई हैं। डॉक्टर यहां झांकने नहीं आते। एएनएम भी जहां तहां बैठकर सरकार की आंखों में धूल झोंक रही हैं। गांव में कोई बीमार होता है तो उसे पतारा या घाटमपुर आना पड़ता है। 

रावतपुर चौधरियान में नशेबाजों का अड्डा बना अस्पताल
रावतपुर चौधरियान में बना उपकेंद्र खंडहर होने के साथ अब नशेबाजों का अड्डा बन गया है। उपकेंद्र भवन के आगे झाड़ियों का अंबार लगा है। गांव वाले बताते हैं कि स्वास्थ्य उपकेंद्र में शाम से लेकर देररात तक शराब और गांजा का दौर चलता रहता है। यहां कई सालों से कोई डॉक्टर नहीं आया। किसी जनप्रतिनिधि ने इसे चालू कराने के प्रयास भी नहीं किए।

उप स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम की तैनाती का मुख्य उद्देश्य है कि टीकाकरण में ग्रामीणों को दूरदराज न जाना पड़े। एएनएम बुखार के मरीजों को दवा वितरित नहीं करती हैं। बुखार पीड़ित मरीज का पीएचसी या सीएचसी में उपचार होगा। अभी हाल ही आया हूं। भीतरगांव ब्लॉक के उप स्वास्थ्य केंद्रों के खंडहर में तब्दील होने की जानकारी नहीं है। सभी सेंटरों की साफ-सफाई कराकर सुचारु रूप से चालू कराने का प्रयास करता हूं। 
डॉ. नेपाल सिंह, सीएमओ कानपुर

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