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Kanpur News: बनारस, गाजीपुर, बांदा, उरई, जालौन, झांसी की काली मिट्टी से बन सकती ग्रीनपार्क की पिच

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कानपुर। उन्नाव से आने वाली काली मिट्टी का भंडारण कम होने से अब ग्रीनपार्क में पिच बनाने के लिए अन्य जिलों की मिट्टी को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कमला क्लब में आयोजित पिच एंड ग्राउंड कमेटी की कार्यशाला में इसके लिए बनारस, गाजीपुर, बांदा, उरई, जालौन, झांसी समेत कई अन्य जिलों से काली मिट्टी के सैंपल मंगवाए गए थे। सभी सैंपल परीक्षण के लिए मुंबई स्थित लैब भेजे गए हैं। इनमें सबसे श्रेष्ठ मिट्टी से ग्रीनपार्क में पिच तैयार होगी।
अभी तक ग्रीनपार्क में उन्नाव के बीघापुर से आने वाली काली मिट्टी से ही पिच तैयार होती थी। इसका स्रोत समाप्त होने से ग्रीनपार्क के पास मात्र छह महीने का कोटा ही रिजर्व है। ऐसे में स्टेडियम की नौ मुख्य पिच के साथ ही चार अभ्यास पिच और कमला क्लब की चार मुख्य पिच के साथ चार अभ्यास पिच के निर्माण पर संकट के बादल छाए हैं। इसे देखते हुए यूपीसीए की ओर से प्रदेश के अन्य जिलों से काली मिट्टी के सैंपल मंगवाए गए हैं। इन्हें मृदा विशेषज्ञ डॉ. संजय राय ने देखने के बाद परीक्षण के लिए मुंबई स्थित कार्यशाला में भेजा है। सबसे श्रेष्ठ मिट्टी से भविष्य में ग्रीनपार्क व कमला क्लब में पिच तैयार की जाएगी।
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दिल्ली के फिरोजशाह कोटला, मुंबई के वानखेड़े, नवी मुंबई के डीवाई पाटिल, बंगलूरू के चिन्नास्वामी समेत अन्य स्टेडियम में पिच निर्माण के लिए पांच वर्ष की मिट्टी का भंडारण होता है। इसमें पांच हजार घन फीट मिट्टी रिजर्व में होती है। यूपीसीए के सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि काली मिट्टी की पिच बल्लेबाजों की मददगार होने के साथ-साथ गेंदबाजों को गति व स्विंग भी देती है।
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