एसडीएम सदर डीडी वर्मा की जांच में खुलासा हुआ है कि शहर में रह रहे बांग्लादेशियों ने भौंती प्रतापपुर में ग्राम सभा और चारागाह की दो हेक्टेयर (करीब दस बीघा) जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमा लिया।
अब इस जमीन से इन्हें बेदखल करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। जल्द ही इनके अवैध कब्जे हटवाए जाएंगे। विस्थापित 106 बांग्लादेशी और पाकिस्तानी परिवारों को 1976 में भौंती प्रतापपुर में पांच-पांच बीघा जमीन खेती करने के लिए दी गई थी। कुछ बांग्लादेशियों ने ग्राम समाज की बेशकीमती जमीन पर कब्जे कर लिए।
एसडीएम सदर ने बताया कि जांच में कुल दो हेक्टेयर जमीन पर बांग्लादेशियों का अवैध कब्जा मिला है। इन्हें जल्द इससे बेदखल किया जाएगा।
यहां जन्म पर भी नागरिकता जरूरी
विस्थापित बांग्लादेशियों के यहां जन्मे बच्चों को भी नागरिकता लेने के बाद ही वोट देने का अधिकार मिल सकता है। अभी ज्यादातर को भ्रम है कि चूंकि विस्थापितों के बच्चे यहीं पैदा हुए हैं। इसलिए बिना नागरिकता लिए उनका वोटर आईडी बन सकता है। अधिवक्ताओं के मुताबिक इंडियन सिटीजन एक्ट के सेक्शन वन में इस स्थिति को स्पष्ट किया गया है।
ब्लास्ट के बाद निगरानी को कहा था
दिल्ली हाईकोर्ट धमाके के तार बांग्लादेश से जुड़ने के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने सभी राज्यों से बांग्लादेशियों की निगरानी को कहा था। इस पर राज्य सरकार ने गाइड लाइन जारी की थी। शहर में निगरानी न होने के कारण ही बिना नागरिकता के वोटर आईडी बन गए।
निर्वाचन दफ्तर संदेह के दायरे में
बुधवार को जिला निर्वाचन दफ्तर का कहना था कि तत्कालीन एसडीएम की जांच में बांग्लादेशियों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की जांच रिपोर्ट बीड आउट (नष्ट करना) कर दी गई है। गुरुवार को कहा गया कि शायद फाइल रखी है। पिछले माह राजस्व परिषद अध्यक्ष के मुआयने के दौरान इधर-उधर हो गई। बाद में कहा गया कि वह फाइल तहसील में है। गुरुवार को प्रमुख सचिव के दौरे के कारण अफसरों की व्यस्तता से बिना नागरिकता वोटर आईडी बनने की जांच शुरू नहीं हो सकी।