नोट की चोट के बाद सोना (गोल्ड) के बुरे दिन आ गए हैं। नोटबंदी के बाद एक माह में ज्वैलरी की 80 फीसदी डिमांड कम हुई है। इसका असर सोने के भाव पर पड़ा है। नोट बंदी के बाद से अब तक सोने में 3100 रुपये तक की गिरावट आई है। कारोबारियों का अनुमान है कि नए साल में सोना 25 हजार रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है।
करेंसी की किल्लत से सराफा कारोबार धड़ाम है। नोट बंदी के दिन आठ नवंबर को सोने का भाव 31250 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसके बाद दिन ब दिन सोने के भाव गिरते गए। शुक्रवार को सोने की कीमत 28150 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई। बीते नौ माह में सोने की यह कीमत सबसे निचले स्तर पर है। सराफा कारोबारियों का मानना है कि देश भर में सोने की डिमांड कम होने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी इसका असर पड़ा है। इसके बनिस्पत शेयर मार्केट मजबूत हुआ है। सोने में निवेश करने वालों ने शेयर मार्केट की ओर रुख कर लिया है। इसके अलावा नोट बंदी के शिकार लोगों ने सहालग में भी कम खरीदारी की। बड़ी संख्या में आभूषणों के आर्डर कैंसिल हो गए। डिमांड का स्तर इतना घट गया कि असर इसके भाव पर पड़ा।
सराफा बाजार में बीते आठ माह से कारोबारियों की हालत खराब है। एक के बाद एक ऐसी स्थितियां आ रही हैं कि खर्चा निकालना तक मुश्किल पड़ा रहा है। नोट बंदी के बाद से बिक्री घटकर 20 फीसदी रह गई है। 10 दिन पहले तो इतना भी बाजार नहीं था। माना जा रहा है कि नोट बंदी का असर अगले छह माह तक रहना है। इस वजह से सोने के भाव में तेज गिरावट आ सकती है।
रामकिशोर मिश्रा, मंत्री, यूपी सराफा एसोसिएशन