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Kanpur News: युवावस्था और बुढ़ापे में ज्यादा होता घेंघा का कैंसर

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कानपुर। हिमालयी शृंखला और गंगा के तराई क्षेत्र की मिट्टी में आयोडीन की मात्रा कम रहती है। बारिश के कारण आयोडीन युक्त मिट्टी की पर्त बहती रहती है। इससे इस क्षेत्र में थायराइड ग्रंथि की गांठ जिसे घेंघा कहते हैं अधिक होता है। यह बात केजीएमयू के प्रोफेसर और यूपी एसोसिएशन सर्जंस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा ने बताई। उन्होंने कहा कि 20 साल से कम और 60 साल से अधिक आयु में घेंघा का कैंसर अधिक होता है।
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डॉ. मिश्रा ने बताया कि सबसे आसानी से ठीक होने वाला डिफ्रेंसिएटेड कैंसर थायराइड ग्रंथि का होता है। इसके साथ ही सबसे खतरनाक एनाप्लास्टिक कैंसर भी इसी ग्रंथि में होता है। इस कैंसर में 24 घंटे के अंदर ग्रोथ होती है। रोगी छह से नौ महीने तक जिंदा रह पाता है। डॉ. मिश्रा का कहना है कि 50-60 फीसदी रोगियों के थायराइड की गांठ मिलती है। इनमें पांच फीसदी कैंसर प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि अगर अचानक आवाज बदले तो जांच जरूर करा लें। घेंघा का कैंसर गले के अंदर सांस की नली तक चला जाता है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि दो प्रतिशत पुरुषों को स्तन कैंसर होता है। इनकी ग्रंथि महिलाओं की तुलना में छोटी होती है। अगर गांठ उभरे, दर्द रहे, घाव ठीक न हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
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