कानपुर देहात। संक्रामक बीमारियों से लोगों की जान पर जान जा रही हैं। पुखरायां में अमरौधा के सुजौर गांव में फिर एक किशोर की मौत हो गई। यहां मरने वालों की संख्या चार पहुंच गई है। झींझक के रामपुर डगराहा में भी उल्टी-दस्त ने एक बच्चे की जान ले ली। वहां के स्वास्थ्य केंद्र में ओआरएस तक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीम सुजौरा में कैंप लगाकर इलाज का दावा कर रही है। फिर भी बीमार लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सीएमओ के बंदोबस्त बीमारी की रोकथाम में असफल साबित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिलाधिकारी के माध्यम से बीमारी पर अंकुश लगाने के विशेष बंदोबस्त होने चाहिए।
पुखरायां प्रतिनिधि के मुताबिक सुजौर गांव में फैली उल्टी-दस्त की रोकथाम के लिए तीसरे दिन सोमवार को मरीजों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाया। इसमें 16 मरीजों का इलाज किया गया। इनमें से चार मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुखरायां भेजा गया। शिविर में अजय की पुत्री कोमल (16), श्रीबाबू की पुत्री पूनम (15), राम प्रकाश की पुत्री संध्या (18), छम्मन के पुत्र रिजवान (16), संतोष की पत्नी वीरमति (40), डल्ले (60) को दवाएं दी गईं। सुरेंद्र पाल (38), संतोष के पुत्र तानुस (1), अमर सिंह की पुत्री गौरी (8), कल्लू (80) राजेश की पुत्री, शारदा (45), अजीम (70), अमृत पाल (24), चंद्र प्रकाश (68), रामदेव सचान (42), रणधीर (56) का इलाज किया गया। गंभीर हालत में कोमल, पूनम, रिजवान व संध्या को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। डा. आरती ने मरीजों का इलाज किया। धर्मेंद्र की पुत्री पलक (15) उल्टी-दस्त का शिकार हो गई। इलाज के लिए परिजन घाटमपुर ले जा रहे थे। रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। डिप्टी सीएमओ डॉ.एके वर्मा का कहना है कि बीमारी नियंत्रण में है। दूषित पानी से बीमारी फैल रही है।
झींझक प्रतिनिधि के मुताबिक रामपुर डगराहा गांव निवासी दो वर्षीय बच्चे की उल्टी और दस्त से मौत हो गई। डॉक्टर का कहना है कि बच्चे को समय से उपचार नहीं मिल सका। विनय कुमार ने बताया कि उसके दो वर्षीय पुत्र अंश को रविवार की रात अचानक उल्टी और दस्त आने लगे थे। सुबह होने तक उसकी हालत बिगड़ गई। सुबह छह बजे बच्चे को लेकर झींझक सीएचसी पहुंचे। वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। डॉ. प्रतीक पांडेय ने बताया कि बच्चे को डायरिया हुआ था। प्राथमिक उपचार समय से न मिल पाने के कारण सीएचसी आने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। गांव के राम आसरे, दुजेंद्र कुमार, शिवम कुमार, विकल्प और रमेश ने बताया कि गांव में गंदगी और जलभराव से बीमारी फैलने का खतरा है। सीएचसी में एक सप्ताह से ओआरएस पाउडर तक उपलब्ध नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को ओआरएस नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेश कुमार ने बताया कि ओआरएस के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। जल्द ओआरएस मिल जाएगा। इसके बाद मरीजों को दिया जाएगा।