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चंदे के रूप में किसी को जकात देना गलत : नजमी

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कानपुर। हजरत दादा मियां की खानकाह के सज्जादानशीं सैयद अबुल बरकात नजमी का कहना है कि चंदा के रूप में किसी को जकात न दें। रमजान में अक्सर लोग चंदा मांगने वालों, संस्थाओं को जकात का पैसा दे देते हैं। हदीस पाक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिसको जकात दी जाए, वह उस धनराशि का मालिक बन जाए। चंदा में ऐसा नहीं होता। चंदा लेने वाला किसी और कार्य के लिए काम करता है। इसी तरह विभिन्न मजहबी संस्थाओं के लोग चंदा ले लेते हैं। जकात उसके हकदार को दें।
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बेकनगंज स्थित खानकाह में आयोजित तकरीर में सज्जादानशीं नजमी ने कहा कि रमजान में जकात के हकदारों को गली-कूंचों में जाकर ढूंढो। बहुत से लोग हकदार होते हैं लेकिन आत्मसम्मान की वजह से किसी को अपनी परेशानी नहीं बताते। ऐसे लोगों की तलाश करके उनकी सम्मान के साथ मदद करो। अगर कोई गरीब और मजबूर है तो उसके आत्म सम्मान का खास ख्याल रखो। रमजान मोहब्बतों का महीना है। अगर कोई झगड़ा पर आमादा होता हो तो उसको सलाम करके हट जाओ।

उन्होंने कहा कि रमजान सब्र का महीना है। एक-दूसरे का दुख बांटने का महीना है। इस महीने में इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए। सज्जादानशीं नजमी ने कहा कि बहुत से लोग इफ्तार करने के बाद ओवर ईटिंग कर लेते हैं। यह गलत तरीका है। हदीस पाक में आया है कि जितनी भूख हो उससे थोड़ा कम खाओ। रमजान में खासतौर पर इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
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