बयानों के आधार पर ही दी गई थी जमानत
तत्कालीन थानाप्रभारी नवाबगंज रोहित तिवारी का दावा था कि मृतक सागर के भाई ने बयान दिए थे कि कार में चार नहीं पांच लोग थे। कार एक युवक चला रहा था। उसके बयानों के आधार पर ही डॉक्टर के बेटे व उसके तीन अन्य दोस्तों को थाने से जमानत दे दी गई थी।
डॉक्टर ने लाखों रुपये एक बिचौलिए के जरिये बांटे थे
अमर उजाला की पड़ताल में पता चला था कि घटना को ठंडे बस्ते में डालने के लिए डॉक्टर ने लाखों रुपये एक बिचौलिए के जरिये बांटे थे। इसके बाद पुलिस ने मृतक परिवार के परिजनों से बयान बदलवाकर आरोपी किशाेरों छोड़ दिया था।
दोनों अधिकारी अभी तक जांच पूरी नहीं कर सके
मामला संज्ञान में आने के बाद डीसीपी ने हादसे की जांच एसीपी कर्नलगंज मोहम्मद अकमल खान और पुलिस की भूमिका और रुपये की लेनदेने की जांच एडिशनल डीसीपी सेंट्रल आरती सिंह को दी थी। घटना के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी दोनों अधिकारी अभी तक जांच पूरी नहीं कर सके।
परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं
एडीसीपी सेंट्रल आरती सिंह का कहना है कि मृतक के परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। उन्होंने रुपये न मिलने की बात कही है। जबकि बिचौलिये और कार सवार किशोरों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। शुक्रवार को इनका भी बयान दर्ज किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक परिवार ने किया है पैसे मिलने से इन्कार
बता दें प्रकरण में 15 लाख रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ था। अमर उजाला की पड़ताल में सागर के भाई ने एक भी रुपये मिलने से इन्कार किया था। आशीष के भाई राजकुमार ने 1.90 लाख रुपये मिलने की बात कही थी। अमर उजाला के पास इनकी बातचीत के साक्ष्य हैं। ऐसे में साफ था कि बाकी रुपये बिचौलिये खा गए। वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर भी आरोपी पक्ष से रुपये वसूलने का प्रयास किया गया था।