सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में आरोपी लेखपाल पर पुलिस की खूब मेहरबानी रही। यही वजह है कि उसकी अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई। एफआईआर में आरोपी करन व लेखपाल रंजीत नामजद हैं और दो आरोपी अज्ञात में हैं।
आरोपी करन और लेखपाल रंजीत अपने दो दोस्तों के साथ आते थे। दुष्कर्म करते थे। कहते थे कि अगर घर पर किसी को बताया तो जान से मार देंगे। पीड़िता का यह बयान उस वक्त का है जब आरोपियों पर केस दर्ज किया गया था। बयान का वीडियो परिवार वालों ने अब उपलब्ध कराया है।
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बयानों में सच्चाई बताने पर भी पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साध ली थी। पुलिस अब इस वीडियो को भी जांच में शामिल करेगी। अक्तूबर को पीड़िता के पिता ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इस दौरान पीड़िता ने पूरी घटना बताई थी।
तब किसी ने उसका वीडियो बनाया था। अब जब उसकी मौत हो गई तो परिवार वालों ने वीडियो जारी किया है। वीडियो में पीड़िता कहते सुनाई दे रही है कि करन और लेखपाल आते थे। उनके साथ दो और लोग भी रहते थे।
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उनका नाम नहीं जानती है लेकिन देखकर पहचान कर लेगी। वह कहती है कि ये सभी उसके साथ दुष्कर्म करते थे। कहते थे कि सफाई (अबॉर्शन) करवा देंगे। पीड़िता की मौत के बाद ये बयान बेहद अहम हो गया है।
एक सीओ, दो एसओ जांच के घेरे में
केस की विवेचना पहले सीओ बिल्हौर ने की। फिर ककवन थानेदार केके कश्यप और जब उनका तबादला हो गया तो वर्तमान थानेदार कौशलेंद्र प्रताप सिंह कर रहे थे। सभी ने लापरवाही बरती। परिजनों ने सभी पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।
इसलिए ये तीनों पुलिस अफसर जांच के घेरे में हैं। हालांकि कौशलेंद्र प्रताप ने 23 नवंबर को ही ककवन थानेदार का चार्ज संभाला है। उन्होंने ही कार्रवाई करते हुए मामले में एक आरोपी को जेल भेजा है। अन्य दोनों पर गंभीर आरोप हैं। वह सीधे तौर पर सवालों के घेरे में हैं।
तीन साल की थी तब मां की हो गई थी मौत
किशोरी जब तीन साल की थी तभी उसकी मां की मौत हो चुकी थी। वह अपने पिता व भाई के साथ रहती थी। रिश्तेदारों ने भी उसकी देखरेख की। परिवार में कोई महिला नहीं थी, शायद इसलिए वह अपने ऊपर बर्बरता सहती रही।
लेखपाल पर मेहरबान रही पुलिस
सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में आरोपी लेखपाल पर पुलिस की खूब मेहरबानी रही। यही वजह है कि उसकी अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई। एफआईआर में आरोपी करन व लेखपाल रंजीत नामजद हैं और दो आरोपी अज्ञात में हैं।
इनपर एससी-एसटी एक्ट भी लगा था। नामजद आरोपी भी अनुसूचित जाति के हैं इसलिए सीओ बिल्हौर सुशील कुमार ने विवेचना के दौरान धारा हटा दी थी। सवाल है कि जब केस में दो अज्ञात आरोपियों की पहचान नहीं हुई तो पहले ही धारा क्यों हटाई गई।
पिता बोला, पुलिस ने पैसे खाए, इसलिए गिरफ्तारी नहीं हुई
पीड़िता के पिता रोते बिलखते हुए कह रहे थे कि पुलिस ने इसमें कार्रवाई नहीं की। क्योंकि पुलिस ने पैसे खाए थे। यही वजह है कि लेखपाल की गिरफ्तारी नहीं की गई। कई बार वह थाने चौकी के चक्कर लगाए लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।
लेखपाल पर विभाग की भी मेहरबानी
आरोपी रंजीत उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ तहसील इकाई का अध्यक्ष है। उस पर विभाग भी मेहरबान रहा है। एफआईआर दर्ज हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन उसके खिलाफ अब तक विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक कि उसको निलंबित तक नहीं किया गया। इससे लेखपाल की हनक का अंदाजा लगाया जा सकता है।