धर्मनगरी में तीन दिवसीय हिंदू एकता महाकुंभ के दूसरे दिन बुधवार को आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हिंदू और हिंदुत्व से लेकर सत्ता पाने के रास्ते बताए। हिंदुओं को संगठित होकर कार्य करने का संकल्प दिलाया। धर्मांतरण के मसले पर कहा कि जो लोग हिंदू धर्म छोड़ चुके हैं, उनकी घर वापसी का काम करना है।
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उन्होंने भारतीय संस्कृति के अनुरूप शिक्षा देने, बिना अहंकार व नि:स्वार्थ होकर देश के लिए कार्य करने की प्रतिज्ञा भी दिलाई। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म का आचरण करते हुए संगठित होकर नि:स्वार्थ भाव और बिना अहंकार कार्य करने से कठिन से कठिन कार्य में भी सफलता मिल जाती है।
किसी दल का नाम लिए बिना वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य पर तंज भी कसा। सत्ताधारियों को नसीहत दी कि राज्य की सत्ता पाने के लिए अहंकार नहीं जनता के बीच जाकर काम करने की जरूरत है। जिस तरह भारत रत्न नानाजी देशमुख ने अपने नहीं, अपनों के लिए काम किया, उसी तरह हिंदू वर्ग, जाति, भाषा और पंथ को मिलाकर सशक्त और समरस करने की जरूरत है।
इनके अलावा प्रमुख संतों ने पर्यावरण, जल के शुद्धिकरण, वायु प्रदूषण, भारतीय संस्कृति को लेकर विचार रखे। कार्यक्रम आयोजक व अध्यक्षता कर रहे जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने महिलाओं की सुरक्षा, धर्म के साथ कार्य करने सहित हिंदू समाज के लोगों को संगठित करने के लिए आजीवन कार्य करने की अपील की।
इन्होंने भी की शिरकत
कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक संत श्रीश्री रविशंकर, स्वामी चिदानंद सरस्वती परमार्थ आश्रम ऋषिकेश, साध्वी ऋतंभरा वात्सल्य ग्राम वृंदावन, कथा वाचक चित्रलेखा, मूलकपीठाधीश्वर संत राजेंद्र दास महाराज वृंदावन, महामंडेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, जगद्गुरु श्यामा शरणाचार्य निंबर्कतीर्थ राजस्थान, विश्व प्रसन्नतातीर्थ जी महाराज पेजावरमठ, उड़पी कर्नाटक, जगद्गुरु रामनुजाचार्य चिन्नाजियार स्वामी महाराज हैदराबाद, आचार्य रामचंद्र दास, दिव्य जीवन दास, रामहृदय दास, डॉ. रामनारायण त्रिपाठी, नवलेश दीक्षित, बृजेंद्र शास्त्री सहित कई अन्य संत मौजूद रहे।