घंटाघर सुतरखाना स्थित गणेश मंदिर के सेवक दिनेश गुप्ता बताते हैं कि इस मंदिर की खास बात कि यहां गजानन पहले तल पर विराजमान हैं। बाकी मंदिरों में गजानन की प्रतिमा नीचे ही स्थापित है।
कानपुर में घंटाघर सुतरखाना स्थित गणेश मंदिर करीब 101 वर्ष पूर्व अंग्रेजों का ठिकाना हुआ करता था। मंदिर के सेवक दिनेश गुप्ता बताते हैं कि पास में ही एक मस्जिद थी। अंग्रेजों को लगता था कि यहां मंदिर का निर्माण हुआ तो दोनों समुदाय आमने सामने आ सकते हैं।
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इस कारण मंदिर नहीं बनने दिया जा रहा था। एक दिन बाल गंगाधर तिलक ने इसी स्थान पर बैठक कर मंदिर की नींव रखने का एलान कर दिया। दूसरे समुदाय के लोगों ने भी इसका समर्थन किया और मंदिर की नींव रखी गई। करीब दो माह बाद फिर बैठक हुई और चावल व्यापारी रामचरण गुप्ता ने मंदिर का निर्माण कराने की ठानी।
उन्होंने अंग्रेजों से मंदिर बनाने की इजाजत ली और कहा कि मंदिर अंदर की तरफ ही बनाएंगे। अंदर ही पूजा करेंगे। इसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ। सन 2000 में मंदिर का भव्य निर्माण अयोध्या के स्वामी सच्चिदानंद ने कराया था।
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मंदिर की विशेषताएं
मंदिर के सेवक दिनेश गुप्ता बताते हैं कि इस मंदिर की खास बात कि यहां गजानन पहले तल पर विराजमान हैं। बाकी मंदिरों में गजानन की प्रतिमा नीचे ही स्थापित है। गणेश जी की सूंड़ दाएं तरफ है। इसके अलावा गणेश जी रिद्धी-सिद्धी के साथ विराजमान हैं। एक और खास बात यह है कि मंदिर के अंदर दक्षिण मुखी हनुमान जी भी स्थापित हैं और मंदिर की चोटी पर मां गंगा विराजमान हैं। मां गंगा की यह मूर्ति अंग्रेजों के जमाने की है।