हाई लेवल कमेटी का गठन कर जांच का आदेश
सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जगदीश पाल लिफाफा लिए दिखा। पूछताछ में जगदीश ने अपनी गलती भी स्वीकार की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने हाई लेवल कमेटी का गठन कर जांच का आदेश दिया है। उनका कहना है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे होता है खेल
डॉ. अनिल ने बताया कि विवि में फेल हुए छात्रों को बैक पेपर की सुविधा दी जाती है। इसमें पास होने पर रिकॉर्ड रूम में रखे गए दस्तावेजों में उसके नंबरों को ओवरलैप किया जाता है। इसके बाद ऑनलाइन भी नंबर अपडेट कर दिए जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर कर्मचारी नंबरों में हेरफेर करते हैं।
पहले भी सामने आ चुकी है अंकों की गड़बड़ी
विवि में अंकों की गड़बड़ी करने का मामला नया नहीं है। इससे पहले भी नंबरों के हेरफेर में छात्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। विवि में वर्ष 2011-15 के दौरान बीएससी करने वाले गोरखपुर के बरगदवा निवासी छात्र संतोष कुमार गौड़ ने डिग्री के लिए आवेदन किया था। विवि की स्टूडेंट सपोर्ट सेल ने रिकॉर्ड का सत्यापन किया तो मामला संदिग्ध मिला। अंकतालिका और रिकॉर्ड में रखे दस्तावेजों के अनुसार प्रथम वर्ष के चार प्रश्नपत्रों में 96 अंकों की गड़बड़ी मिली। रिकॉर्ड से अंकतालिका में 96 अंक अधिक मिले थे।
एक बाबू को भी गिरफ्तार किया जा चुका है
रिकॉर्ड में संतोष के प्रथम वर्ष में गणित द्वितीय में 17 अंक, भौतिक विज्ञान प्रथम में एक अंक, भौतिक विज्ञान द्वितीय में 16 अंक और रसायन विज्ञान प्रथम में पांच अंक थे। अंकतालिका में क्रमशः 37 अंक, 32 अंक, 34 अंक और 32 अंक मिले थे। संतोष ने एमजी कॉलेज ऑफ साइंस आर्ट एंड कल्चर, उन्नाव से बीएससी पास किया था। इस मामले में संतोष के साथ कॉलेज के एक बाबू को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।