अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराया पैसा
इसके रिफंड के लिए कुछ कागजी कार्रवाई और औपचारिकताएं पूरी करने पर कुल धनराशि पर सरकारी टैक्स जमा करने के बाद रिफंड मिल सकता है। झांसे में आए अरविंद को पॉलिसियों का रिन्युअल कराकर प्रीमियम का भुगतान कराने की बात कहकर 5.55 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराकर हड़प लिए। एडीसीपी ने बताया कि पकड़े गए ठगों में गैंग के सरगना हरियाणा के फरीदाबाद सेक्टर 86 स्थित अमौलिक रेजिडेंसी निवासी विशाल कपूर के अलावा दिल्ली के निहाल विहार नांगलोई निवासी तौफीक, करमपुरा मोतीनगर निवासी रमेश चौधरी, कृष्णा पार्क तिलकनगर निवासी रिषभ और जेजे कालोनी अस्पताल रोड उत्तमनगर निवासी साहिल शामिल हैं।
41 मोबाइल, लैपटॉप हुए बरामद
ठगों के पास से पुलिस ने 41 मोबाइल फोन, एक डेस्कटॉप, एक लैपटाप, एक प्रिंटर, तीन पेन ड्राइव, चार वाईफाई राउडर, चार स्टांप, चार आईडी, चीन सिम कार्ड और एक लाख 6 हजार रुपये बरामद किए हैं।
ऐसे ठगों तक पहुंची पुलिस
एडीसीपी ने बताया कि ठग दिल्ली में कॉल सेंटर दिखाकर सर्च इंजन जस्ट डायल से डाटा हासिल करते थे। जांच के दौरान जिस नंबर से अरविंद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर फोन किया गया थ, उस नंबर की जांच शुरू की। इस नंबर के जरिए पुलिस दिल्ली के रमेशनगर स्थित एएमएसआर वेल्थ क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड नाम से संचालित फर्जी काल सेंटर पहुंच गई।
ऐसे बनाते थे शिकार
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे लोग सबसे पहले जस्ट डायल और अन्य वेबसाइटों से रुकी हुई बीमा पॉलिसी, पॉलिसी धारक का नाम और फोन नंबर हासिल करते थे। इसके बाद पॉलिसी धारक को फोन करके अपने जाल में फंसाते थे। फिर उसको पॉलिसी मैच्योरिटी का झांसा देकर विभिन्न खातों में धन जमा करा लेते थे। इसके बाद फर्जी रसीद लैपटॉप और डेस्कटॉप से तैयार कर ऑफिस में लगे प्रिंटर से प्रिंट कर लोगों को मोबाइल नंबर पर व्हॉटसएप कर देते थे। फिर ठगी में इस्तेमाल सिम और मोबाइल फोन को तोड़कर फेंक देते थे, ताकि पुलिस उन लोगों तक न पहुंच सके।