कानपुर। शादी का झांसा देकर युवती से शारीरिक संबंध बनाया, जब उसने रिपोर्ट दर्ज करा दी तो समझौता करके शादी कर ली और फिर मुकदमे में एफआर लगवा दी। एफआर लगते ही पीड़िता को दोबारा प्रताड़ित करके घर से निकाल दिया। इस पर पीड़िता ने एफआर निरस्त करने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी जिसे सीएडब्लू कोर्ट के न्यायाधीश शिवशंकर दोहरे ने स्वीकार करते हुए अभियुक्त के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के आदेश कर दिए हैं।
नौबस्ता के दीनदयालपुरम की 20 वर्षीय युवती ने हनुमंत विहार थाने में 7 मार्च 2024 को नौबस्ता के रेस कोर्स मैदान निवासी हर्षित यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि हर्षित ने शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाए और उसकी कुछ अश्लील फोटो भी खींच लीं। इसके बाद वह उसे ब्लैकमेल करने लगा और कई बार उसका शारीरिक शोषण किया। 26 फरवरी 2024 को जब युवती ने हर्षित पर शादी करने का दबाव डाला तो उसने जहर पिला दिया। होश आने पर युवती ने खुद को अस्पताल में पाया, जहां उसकी बहन मौजूद थी। पीड़िता का आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने हर्षित को बुलाया और समझौता करके शादी करने का दबाव बनाया जिस पर उसने उससे शादी कर ली और पुलिस से सांठगांठ कर मुकदमे में 5 अप्रैल 2024 को फाइनल रिपोर्ट लगवा दी। एफआर लगने के बाद पीड़िता को फिर से प्रताड़ित करने लगा और मारपीट कर घर से निकाल दिया। इस पर पीड़िता ने अपनी अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में अर्जी दी और एफआर निरस्त करने की मांग की। अधिवक्ता ने तर्क रखा कि विवेचनाधिकारी ने बिना कोई सबूत इकट्ठा किए गलत तरीके से पीड़िता पर दबाव डालकर और अभियुक्त से सांठगांठ कर मुकदमे की सही विवेचना न कर गलत तरीके से एफआर लगा दी। अधिवक्ता के तर्कों व सबूतों को देखने के बाद कोर्ट ने एफआर निरस्त करके परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
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