फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: गर्मी का कहर जारी, दो दिन में 14 लोगों की मौत

Sat, 26 May 2018 04:34 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

- कार्डियोलाजी फुल, हैलट इमरजेंसी, ओपीडी में भी रही भीड़
विज्ञापन
1 of 6
डेमाे पिक
यूपी में गर्मी का कहर बढ़ता ही जा रहा है। कानपुर में भीषण गर्मी से शुक्रवार को चार महिलाओं सहित आठ लोगों व गुरुवार को गर्मी से छह लोगों की मौत हुई थी। हैलट और उर्सला इमरजेंसी में हीट स्ट्रोक के 29 मरीज भर्ती हुए।
 
विज्ञापन

2 of 6
डेमाे पिक
मरीजों से कार्डियोलॉजी इमरजेंसी फुल हो गई। कार्डियोलॉजी में धनकुट्टी निवासी रामशंकर (52), घोसियाना की कमला देवी (60), रानीगंज काकादेव की किरनबाला (39) और फतेहपुर के सुखराज (64) की मौत हो गई। पांच अन्य मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी मरीज खून गाढ़ा होने से हार्ट अटैक के हैं। इस अस्पताल की इमरजेंसी सुबह से ही फुल रही। वहीं हैलट इमरजेंसी में इलाज के दौरान दर्शनपुरवा निवासी प्रेम किशोर (70), चंदारी निवासी अब्दुल रहमान की पत्नी जरीना बेगम, ग्राम चिराना अकबरपुर (कानपुर देहात) निवासी सरोज देवी (50) और ग्राम सरकंडी असोथर (फतेहपुर) में रहने वाले रामआसरे (65) ने दम तोड़ दिया। चार अन्य मरीजों की हालत नाजुक है। सभी मरीज हीट स्ट्रोक के थे। हैलट इमरजेंसी की ओपीडी के मेडिसिन विभाग के तीन कमरों में डॉ. एसके गौतम, डा. सौरभ अग्रवाल, डा. राकेश चंद्रा ने 781 मरीजों का इलाज किया।  

 
विज्ञापन

3 of 6
डेमाे पिक
एसोसिएट प्रोफेसर डा. एसके गौतम ने बताया कि भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक की वजह से किडनी, हार्ट, ब्रेन पर कुप्रभाव पड़ रहा है। ऐसी गर्मी में रहने से खूब पसीना निकलता है। पसीने के साथ कई इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकलते हैं। यदि उसी समय पर्याप्त मात्रा मेें पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स न लिए तो शरीर में फ्लूड कम हो जाता है और खून गाढ़ा हो जाता है। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक का खतरा बढ़ जाता है। गुर्दे भी खराब हो जाते हैं। कार्डियोलाजी के एसोसिएट प्रोफेसर डा. एसके सिन्हा ने बताया इन्हीं वजहों से खून गाढ़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति में हार्ट पर ज्यादा जोर पड़ता है। हार्ट अटैक पड़ने का भी खतरा बढ़ जाता है। खून गाढ़ा होने से अटैक पड़ने वाले मरीज काफी आ रहे हैं।
 

गर्मी में ये एहतियात बरतें

4 of 6
डेमाे पिक
- धूप में न रहें या कम से कम देर तक रहें
- घर से खाली पेट बाहर न निकलें
- एसी या कूलर वाले कमरे से सीधे धूप में न निकलें
- फुल आस्तीन के कॉटन के कपड़े, मोजे, जूते पहनकर धूप में निकलें
- सिर ढकें , ताकि सीधी धूप न लगे
- ताजा एवं शुद्ध पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं
- नीबू पानी, बेल का शर्बत, आम का पना, ओआरएस घोल भी पी सकते हैं
- धूप से लौटकर तुरंत ठंडा पानी न पिएं

 
विज्ञापन

5 of 6
डेमाे पिक
- सिर दर्द, उल्टियां हों तो तुरंत डाक्टर से मिलकर इलाज कराएं
- कुछ -कुछ देर में पानी पीते रहें
- दोपहर 12 से 3 बजे के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें
-किसी भी अवस्था मे कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पिएं। किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें
- जहां तक संभव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें
- ठंडे पानी से नहाएं, ठंडे पानी से चेहरे पर छीटें मारें
- दही, छाछ  का प्रयोग अधिक करें
-फल और सब्जियों को भोजन में ज्यादा स्थान दें
- कमरे में कूलर, एसी न हो तो पानी से भरी बाल्टियां या अन्य खुले पात्रों को पानी भरकर रखने से कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है


 
विज्ञापन
विज्ञापन

शरीर में पानी की कमी से लगती है लू 

6 of 6
डेमाे पिक
मेडिकल कालेज मेडिसिन विभाग के डा. विशाल गुप्ता के अनुसार हमारे शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। गर्मी में पसीने के रूप में पानी बाहर निकलकर शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है। ऐसा होते समय पानी न पीने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है और पसीना निकलना बंद हो जाता है। शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप होने लगती है, तब शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। शरीर का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर ब्लड गर्म होने लगता है और ब्लड में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है। ब्लड गाढ़ा होने लगता है। ब्रेन तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है। स्नायु कड़क होने लगते हैं। व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, तब उसकी मृत्यु हो सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें