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Kanpur News: इटावा के चार लाख मतदाता बनाएंगे मैनपुरी का सांसद

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इटावा। मैनपुरी लोकसभा सीट प्रदेश की वीआईपी सीटों में शामिल है। बीते 28 सालों से इस सीट पर सपा का कब्जा है। जिले की तीन तहसीलों के चार लाख से अधिक मतदाता इस सीट पर अहम भूमिका निभाते हैं। मुलायम सिंह यादव इस सीट से पांच बार सांसद चुने गए। अगर बात पार्टी की करें तो समाजवादी पार्टी को इस सीट पर 10 बार जीत मिली है। वहीं, गठन के बाद अब तक इस सीट पर भाजपा ने अपना खाता नहीं खोला है।
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यूपी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन है। इंडिया गठबंधन ने एक बार फिर से वर्तमान सांसद डिंपल यादव को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है, लेकिन अब तक एनडीए की तरफ से उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया गया है। बीएसपी ने भी अपने उम्मीदवार का नाम नहीं खोला है। मैनपुरी लोकसभा सीट पर पिछले 28 साल से समाजवादी पार्टी का दबदबा है। पहली बार साल 1996 में इस सीट पर सपा उम्मीदवार के तौर पर मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने बीजेपी के उपदेश सिंह चौहान को हराया था।
इसके बाद से इस सीट पर सपा की जीत का सिलसिला बरकरार है। मुलायम के निधन के बाद हुए उपचुनाव को शामिल करके मैनपुरी में सपा को 10 वीं बार जीत मिली थी। जबकि कांग्रेस के उम्मीदवारों ने पांच बार जीत का परचम लहराया है। यहां के मतदाताओं ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, बीएलडी, जनता पार्टी (सेकुलर), जनता दल और जनता पार्टी को एक-एक बार जीत मिली, लेकिन भाजपा यहां से पहली जीत का इंतजार कर रही है। भाजपा की तमाम लहरों के बाद भी यहां के मतदाताओं पर अपना रंग नहीं चढ़ सकी है। (संवाद)
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मैनपुरी लोकसभा सीट पर कुछ इस प्रकार चढ़ा सपा का खुमार

मैनपुरी लोकसभा सीट को पहले मैनपुरी जिला पूर्व के नाम से जाना जाता था। इस सीट पर साल 1951-52 में कांग्रेस के बादशाह गुप्ता को जीत मिली थी। इसके बाद इस सीट का नाम बदलकर मैनपुरी लोकसभा सीट कर दिया गया। साल 1957 आम चुनाव में इस सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बंशी दास धनगर ने बादशाह गुप्ता को हराया। लेकिन साल 1962 के चुनाव में बादशाह गुप्ता ने वापसी की और दूसरी बार सांसद बने। साल 1967 के आम चुनाव में कांग्रेस ने बादशाह गुप्ता की जगह महाराज सिंह को उम्मीदवार बनाया। महाराज सिंह ने 1967 और 1972 आम चुनाव में जीत दर्ज की। आपातकाल के बाद साल 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के रघुनाथ सिंह वर्मा को जीत मिली। साल 1980 में जनता पार्टी (सेकुलर) के उम्मीदवार के तौर पर रघुनाथ सिंह वर्मा ने फिर से जीत दर्ज की। साल 1984 में कांग्रेस ने बलराम सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया। बलराम सिंह को जीत मिली, लेकिन साल 1989 में फिर से ये सीट जनता दल के खाते में चली गई। उदय प्रताप सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार को हराया। साल 1991 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उदय प्रताप सिंह ने ही जीत हासिल की और फिर मुलायम सिंह का दौर शुरू हुआ। साल 1996 में मुलायम सिंह यादव ने जीत हासिल की। जबकि साल 1998 और साल 1999 के चुनाव में सपा के बलराम सिंह यादव को जीत मिली। साल 2004 में एक बार फिर मुलायम सिंह यादव सांसद चुने गए। इसी वर्ष हुए उपचुनाव में सपा के धर्मेंद्र यादव सांसद बने। 2009, 2014 और 2019 में भी मुलायम सिंह ने जीत दर्ज की। साल 2014 में जीत के बाद मुलायम सिंह यादव ने सीट छोड़ दी थी। इसके बाद उपचुनाव में सपा के तेज प्रताप सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी और फिर मुलायम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में डिंपल यादव सांसद चुनीं गईं।


जीत में अहम भूमिका निभाएंगे इटावा के चार लाख मतदाता
जिले के जसवंतनगर, ताखा और सैफई तहसीलों के 4,01740 मतदाता इस बार लोकसभा चुनाव में भाग लेंगे। इसमें 2,15,061 पुरुष व 1,86,668 महिला मतदाता शामिल हैं। विधानसभा जसवंतनगर में मतदान प्रक्रिया के लिए इस बार 336 मतदान केंद्र व 452 मतदेय स्थल बनाए गए हैं। साथ ही क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया सही और निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो, इसके लिए पांच जोनल व 54 सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है।
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