इटावा। जनपद में बिजली निगम में टेंडर के रूप में जमकर खेल किया जा रहा था। चहेती फर्मों को टेंडर देने के लिए दूसरी योग्य फर्मों को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। इसमें निगम के उच्चाधिकारियों सहित निचले स्तर के कर्मचारी भी शामिल थे। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक की ओर से रविवार को जनपद के अधीक्षण अभियंता को निलंबित करने के बाद अन्य कर्मचारियों व अधिकारियों पर गाज गिरने की आशंका बनी हुई है।
भरथना निवासी विजयराज ने प्रबंध निदेशक से अधीक्षण अभियंता मनोज कुमार गौड़ व कार्यालय में तैनात दो संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर पर टेंडर प्रक्रिया में मनमानी की शिकायत की थी। प्रारंभिक जांच के बाद निगम ने निदेशक तकनीकी की अगुवाई में जांच टीम का गठन किया था। टीम की ओर से 20 सितंबर 2025 को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। प्रारंभिक जांच में अधीक्षण अभियंता पर अनियमितता के आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार ने अधीक्षण अभियंता मनोज कुमार गौड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, ई-निविदा नंबर 59/EDCE/2024-25, 60/EDCE/2024-25, 61/EDCE/2024-25, 62/EDCE/2024-25, 63/EDCE/2024-25, 64/EDCE/2024-25 दिनांक नौ सितंबर 2024 को समाचार पत्रों में प्रकाशित किए गए थे। इस प्रक्रिया में इंडियन इलेक्ट्रिकल, सुरक्षा ट्रेडर्स, आकांक्षा ट्रेडर्स, एसआर कंस्ट्रक्शन और जानवी कंस्ट्रक्शन ने प्रतिभाग किया था।
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस प्रक्रिया में इंडियन इलेक्ट्रिकल के संचालक के चरित्र प्रमाण पत्र की जगह उसका आवेदन पत्र लगा दिया गया था। उसके बाद टेंडर सीट पर तैनात दो संविदाकर्मियों और अधीक्षण अभियंता ने फर्म को योग्य मान लिया। फर्म को जमायोजना, केबिल बॉक्स व पावर परिवर्तक मेंटेनेंस में लगभग नौ लाख की धनराशि का अनुबंध करवाकर फर्म को भुगतान कर दिया गया, जबकि टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य फर्मों को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया।