कानपुर। लोगाें को डिजिटल अरेस्ट करने और सरकारी योजनाओं का लाभ देने के नाम पर खातों से रकम ट्रांसफर कर साइबर फ्रॉड करने के चार आरोपियों को कर्नलगंज पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस ने शातिरों के पास से अलग-अलग बैंकों की पासबुक, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड, फर्जी आधार कार्ड समेत बरामद किए हैं।
आरोपियाें में बांदा की कांशीराम कालोनी निवासी अमित कुमार गुप्ता,कैलाशपुरी निवासी विपिन गुप्ता, कटरा निवासी हरिओम द्विवेदी और मड़ियाना निवासी सत्यम गुप्ता शामिल हैं। ये लोग पहले गरीब लोगों के खाते खुलवाकर डेबिट कार्ड ले लेते। इन्हें कोरियर और रोडवेज बस के माध्यम से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों में बैठे साइबर ठगों को भेजते थे। इनके माध्यम से मोटी कमाई करते। आरोपी खाताधारकों को डेबिट कार्ड के बदले साढ़े सात से लेकर 20 हजार रुपये तक खाते का किराया भी देते थे।
शातिरों ने पूछताछ में बताया कि वे लोग कम पढ़े लिखे लोगो से संपर्क कर उन्हें धोखे में रखकर बैंक में खाता खुलवा देते हैं। बदले में लिमिट प्रतिदिन 25 हजार रुपये होने पर प्रतिमाह 7500 रुपये और लिमिट प्रतिदिन 50 हजार रुपये होने पर प्रतिमाह 10 हजार रुपये किराया देते। इसके बाद उनका खाता खोलने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड जान पहचान वाले आधार केन्द्र में भेजकर ओटीपी द्वारा कानपुर व आसपास के जिलों का फर्जी पता आधार में अपडेट करवाते हैं तथा उसी आधार को ई-आधार के माध्यम से डाउनलोड कर प्रिन्ट कराकर उनसे बैकों में खाता खुलवाते हैं।
शातिरों ने बताया कि नैनीताल बैंक, महाराष्ट्र बैक, पाॅवर को ऑपरेटिव बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक आदि बैंकों में खाता खुलवाते हैं। चूंकि इनके एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड आदि कोरियर या डाक के माध्यम से न आकर खाता धारक को खाता खोलते समय ही दे दिए जाते हैं, ऐसे में आधार में दिए हुए फर्जी पते की पोल नहीं खुल पाती। खाता खोलते समय नया सिम लेकर बैंक खाते में मोबाइल नंबर लिंक करा देते हैं। खाता एक्टिवेट होने के बाद एक डिफाॅल्ट पासवर्ड बनाकर राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा में रहने वाले अपने गैंग के सदस्यों को परिवहन बस के माध्यम से एटीएम कार्ड व संबंधित खाते में लिंक मोबाइल नंबर का सिम कार्ड पार्सल कर देते हैं जिसके माध्यम से ऑनलाइन साइबर फ्रॉड करके खातों में पैसा ट्रांसफर करवाते हैं।