मजबूत इरादे ही मंजिल का रास्ता दिखाते हैं। चंडीगढ़ के संदीप अग्रवाल ने पढ़ाई खत्म करने के बाद देश और विदेश में कई नौकरियां की। सालाना सैलरी सात करोड़ रुपये तक पहुंची, रहने को कंपनी की ओर से घर मिला और चलने के लिए लग्जरी गाड़ी से भी संदीप का मन नहीं भरा। खुद की कंपनी शुरू करने के इरादे को सच में बदलने के लिए एक झटके में ही नौकरी छोड़ दी। आज संदीप दस हजार करोड़ के मालिक बन चुके हैं। ई-कॉमर्स सेक्टर कि टॉप वेबसाइट शॉपक्ल्यूज डॉट कॉम के फाउंडर संदीप अग्रवाल शनिवार को आईआईटी कानपुर में चल रहे तीन दिवसीय ई-समिट 2017 में शामिल होने के लिए आए थे। यहां उन्होंने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में अपनी सक्सेस स्टोरी बताई।
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बीकॉम किया फिर चले गए अमेरिका
संदीप अग्रवाल
संदीप चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। शुरूआती पढ़ाई वहीं की। कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी से 1992 में संदीप ने बीकॉम किया। फिर वह एक छोटी नौकरी करने लगे। मन नहीं माना तो एमबीए करने अमेरिका चले गए। पढ़ाई खत्म होने के बाद वहीं की कई कंपनियों में अलग-अलग पदों पर काम किया। जैसे-जैसे बढ़ते गए पद और सैलरी भी बढ़ी। संदीप बताते हैं कि 2009 के बाद उनका सालाना पैकेज सात करोड़ रूपये हो गया था। संदीप वहीं रहकर नौकरी के साथ-साथ मार्केट का रिसर्च भी करते थे। इसी दौरान उन्हें एक कंपनी शुरू करने का आइडिया आया और 2011 में नौकरी छोड़कर देश लौट आए।
पूरी कमाई लगाकर शुरू की कंपनी
संदीप अग्रवाल
संदीप बताते हैं कि देश वापसी के बाद उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगाकर शॉपक्ल्यूज डॉट कॉम की शुरूआत दिल्ली से की। पहले काफी परेशानी हुई। जहां से खुद समान लेते थे उन दुकानदारों को अपना कांसैप्ट बताया। उनके सामान लेकर वह ऑनलाइन बेचने लगे और आज यह ई-कॉमर्स सेक्टर में देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। इसका सलाना टर्न ओवर सात हजार करोड़ रुपये है।
दूसरी कंपनी भी शुरू कर दी
संदीप अग्रवाल
संदीप ने बताया कि शॉपक्ल्यूज डॉट कॉम का कांसेप्ट हिट होने के बाद उन्होंने ड्रूम डॉट कॉम नाम की दूसरी कंपनी बनाई। यह कंपनी लोगों को यात्रा कराने, होटल बुकिंग कराने, टूर पैकेज देने का काम करती है। इसका सलाना टर्न ओवर तीन हजार करोड़ रूपये है।
‘सोशल एंटरप्रिन्योरशिप में पैसा भी समाजसेवा भी’
आईआईटी कानपुर में ई-समिट 2017 कार्यक्रम
आईआईटी कानपुर में तीन दिनों से चल रहे ई-समिट 2017 (दि एंटरप्रिन्योरशिप समिट) का रविवार को समापन हो गया। आखिरी दिन सोशल एंटरप्रिन्योरशिप और स्टार्ट अप पर स्टूडेंटों को टिप्स दिए गए। ई-समिट 2017 का मीडिया पार्टनर ‘अमर उजाला’ है।
समिट में ई-कुटीर के फाउंडर केसी मिश्र ने कहा कि सोशल एंटरप्रिन्योरशिप में काम करने की बहुत संभावनाएं हैं। आप एक बेहतर रोजगार तो हासिल करते ही हैं साथ में समाज की सेवा करने का भी आपको मौका मिलता है। मिश्र ने बताया कि सोशल एंटरप्रिन्योरशिप में काफी ग्रोथ है। यही एक ऐसा सेक्टर है जिसके जरिए आप विकास की सही परिभाषा को मूर्त रूप देने में सहभागिता कर सकते हैं।
समर्थ कम्युनिटी के फाउंडर आशीष गुप्ता ने सोशल एंटरप्रिन्योरशिप के फायदे बताए। बोले, इसमें आप पैसे के साथ मन का सुकून और लोगों की दुआएं कमा सकते हैं। ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने के लिए काम कर रहीं इम्प्लस सोशल एंटरप्राइजेज की फाउंडर हसीना ने अपने कामों के बारे में बताया। कहा कि खुद के लिए सभी जीते हैं लेकिन जब आप दूसरों के लिए जीते हैं तो आपको अधिक खुशी मिलेगी। यूएन पीस मेडल से सम्मानित चोकोमोस मीडिया के फाउंडर फिरदौस ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए समिट को संबोधित किया। उन्होंने मीडिया और सोशल इश्यू के बारे में स्टूडेंटों को बताया।
इन उद्यमियों ने भी दिए टिप्स
आईआईटी कानपुर में ई-समिट 2017 कार्यक्रम
शेयरचैट के सीईओ अंकुश सचदेवा ने बताया कि जब आप खुले मन से सोचते हैं तो आपके दिमाग में कई आइडिया आते हैं। उन्हीं में से बस एक आइडिया आपको पिक करना है और उसपर काम करता है। यही आपका स्टार्ट अप होगा। लेकिन याद रहे आपको अपने आइडिया से जुड़े हर पहलू को भी समझने की कोशिश करनी पड़ेगी और उसपर रिसर्च करना पड़ेगा। तभी आप एक सफल एंटरप्रिन्योर कहलाएंगे।
एलग्जिो सीईओ आलोक वाजपेयी ने बताया कि जब आप नौकरी करते हैं तो आपका शेड्यूल तय होता है। काम तय होता है और आपकी आय सीमित रहती है। लेकिन जब आप स्टार्ट अप शुरू करते हैं तो इन सबसे हटकर काम करना पड़ता है। मतलब कंपनी आपकी होगी तो काम ज्यादा करने होंगे। ज्यादा समय आपको देना होगा लेकिन खास बात है कि आप थोड़ा मेहनत करोगे तो आपकी आय काफी ज्यादा बढ़ेगी।
सीईओ नोलैरिटी अंबरीश गुप्ता ने कहा कि एंटरप्रिन्योर बनना आसान है लेकिन सफल एंटरप्रिन्योर बनना कठिन। एंटरप्रिन्योर तो बहुत होते हैं लेकिन जब आप सही मायने में काम करेंगे। आपका कांसेप्ट सही होगा और उसका इंप्लीमेंटेशन सही तरीके से आप करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। यही एक सफल एंटरप्रिन्योर का राज भी होता है।