जब सभी बच्चों तक पहुंचना मुश्किल हुआ तो उन्होंने दूसरे शिक्षकों को साथ में जोड़ा और प्रशिक्षित किया। मौजूदा समय में 100 लोगों की कोर टीम के साथ देशभर से करीब 5000 शिक्षक उनसे जुड़े हैं। छात्रों में प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अन्वेषिका की भी शुरुआत की। अब उनके दोनों अभियान शिक्षा सोपान और अन्वेषिका पूरे देश में पहचान बना चुके हैं।
विज्ञान को समर्पित सोपान आश्रम
प्रो. वर्मा ने करीब छह साल पहले नानकारी के पास करीब दो एकड़ जमीन पर सोपान आश्रम का निर्माण कराया। यहां छात्रों को शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन सिखाया जाता है। सोपान आश्रम में अन्वेषिका की मदद से करीब 1200 प्रयोग तैयार हैं। रिसर्च लैब भी है। दूरदराज के स्कूल भी अपने बच्चों को सोपान आश्रम की विजिट कराने लाते हैं। शिक्षा सोपान में फर्स्ट संडे क्लब होता है। इसमें दूरदराज से शिक्षक आते हैं। पहले विज्ञान के नियमों पर चर्चा होती है और फिर प्रो. वर्मा प्रयोगों पर चर्चा करते हैं।
चिमटे-कुकर में विज्ञान, जलेबी में भी घुला विज्ञान
प्रो. वर्मा रसोई घर में भी विज्ञान ढूंढ लेते हैं। चिमटे में धागे को बांधकर तरंग के नियम बताना, कुकर का प्रेशर पता करना, चकले-बेलन की मदद से वृत्त की परिधि जानना उनकी शिक्षा को और भी रुचिकर बनाता है। उन्होंने बताया कि जलेबी बनने से खाने तक की प्रक्रिया में भी विज्ञान है। जलेबी की मदद से ऊष्मा का संवहन, डूबने-तैरने का सिद्धांत, ऑक्सीकरण (रासायनिक अभिक्रिया), दाब परिवर्तन, बॉयलिंग, दहन (पूर्ण दहन, अपूर्ण दहन), जीभ के विभिन्न भाग में स्वाद के सूचक आदि के बारे में बताया।
छात्रों के लिए होते हैं टेस्ट
अन्वेषिका सचिव अमित वाजपेयी ने बताया कि छात्रों के लिए नेशनल अन्वेषिका एक्सपेरिमेंटल स्किल टेस्ट होता है। इसमें पूरे देश से छात्र हिस्सा लेते हैं। पिछली बार कक्षा नौ से एमएससी तक के 35 हजार छात्रों ने आवेदन किया था। 100 विजेताओं को चुना जाता है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों को विज्ञान में रुचि हैं, वे सीधे सोपान आश्रम या उनकी वेबसाइट
www.shikshs-sopan.org पर संपर्क कर सकते हैं।