ये पौधे अब छोटे-छोटे पेड़ का रूप ले चुके हैं और पूरा क्षेत्र जंगल के रूप में तैयार हो चुका है। इससे पर्यावरण को बढ़ावा मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को रहने के लिए आशियाना बन गया है। वहीं गंगा में बालू का गिरना रुक गया है। आसपास के ग्रामीणों को धूप से बचने के लिए छांव मिलने लगी है। 2018 से पहले 32 हेक्टेयर का बलूयी मरुस्थल हरियाली से लहलहा उठा है।
तैयार की जा रही ग्रीन बेल्ट डलमऊ के पुल के आसपास का 2 हेक्टेयर क्षेत्र भी मरुस्थल था। यहां पर 2019 में खैर का जंगल तैयार किया गया। यहां पर अब पंक्षियों का बसेरा होने लगा है। इसी तरह भिटौरा श्मशान घाट से असनी पुल तक ग्रीन बेल्ट तैयार की गई है। ये पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध हो रही है।
फायदे
1. पर्यावरण संरक्षण में सहायक
2. वन्य जीवों को मिला बसेरा
3. भूजल स्तर बढ़ा
4. गंगा नदी का कटान रुका
गंगा कटरी की जमीन पर प्रस्ताव तैयार करके वृक्षारोपण कराकर जंगल तैयार किया गया है। जंगल तैयार होने से वन्य जीवों के लिए अच्छा प्राकृतिकवास मिला है जो वन्य जीवों को आकर्षित कर रहे हैं। गंगा नदी में बालू का गिरना भी कम हुआ है। भूजल स्तर भी बढ़ा है।- आरएल सैनी, क्षेत्रीय वन अधिकारी, फतेहपुर