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चिड़ियाघर में पहली बार चार डॉक्टरों की टीम ने किया बाघ की आंख का ऑपरेशन, बोले अब देख सकेेगा वो

Fri, 14 Feb 2020 08:50 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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तीन साल का बाघ अमर - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर चिड़ियाघर में पहली बार बाघ की आंख का आपरेशन हुआ। चार डॉक्टरों की टीम को इस काम में दो घंटे लगे। उनका दावा है कि उसे दिखने लगा है। तीन साल के बाघ अमर की दाहिनी आंख में चोट लगने के कारण लालिमा आ गई थी। मोतियाबिंद भी हो गया था।
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उसे एक आंख से दिखना बंद हो गया था। चिड़ियाघर के डॉ. यूसी श्रीवास्तव ने बताया कि तीन-चार दिन पहले वह गर्दन तिरछी कर चलने लगा था। जांच करने पर पता चला कि आंख के स्केरा में चोट की वजह से माड़ा पड़ गया है।

 
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बुधवार को चिड़ियाघर अस्पताल के आपरेशन थियेटर में नेत्र सर्जन डॉ. आरएम तिवारी, चिड़ियाघर के डॉ. आरके सिंह, डॉ. यूपी श्रीवास्तव, डॉ. नासिर की टीम ने दो घंटे चले आपरेशन के दौरान अमर की क्षतिग्रस्त आंख में सुई डालकर पानी (माड़ा) निकाल दिया। डॉ. आरके सिंह ने बताया कि आपरेशन सफल रहा है। स्थानीय चिड़ियाघर में पहली बार इस तरह का आपरेशन हुआ है। अमर को छोटे बाड़े में रखा गया है।

बिजनौर से आए तेंदुए की भी रोशनी लौटी
डॉ. यूसी श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले साल 25 अप्रैल को बिजनौर से लाए गए शेरू (तेंदुआ) को काफी चोटें लगी थीं। एक आंख से दिखाई नहीं दे रहा था। इलाज और फिजियोथिरैपी से उसकी आँख की रोशनी लौट आई है। अब वह स्वस्थ है।

महाराजगंज में शिकारियों के फंदे में फंसकर घायल हुआ तेंदुआ
महाराजगंज से 11 तारीख को लाए गए घायल तेंदुए का इलाज भी यहां चल रहा है। महाराजगंज के जंगल में शिकारियों की तरफ से डाले गए लोहे के फुट और क्लिच वायर के फंदे में फंसकर एक मादा तेंदुआ जख्मी हो गया था। वन विभाग की टीम उसे चिड़ियाघर लाई थी, यहां उसका इलाज चल रहा है। इसकी उम्र करीब 4 साल है।
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