इटावा/चकरनगर। चंबल खतरे के निशान को पार कर चुकी है। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ चौकियों पर तैयारियां पूरी हैं। बोट भी तैयार की जा चुकी हैं लेकिन पड़ताल में बुधवार को दो बाढ़ चौकियां बंद मिलीं। वहीं जिम्मेदार एक चौकी का पता नहीं बता सके। ऐसे में यदि बाढ़ आ गई तो इससे निपटना चुनौती होगा।
चंबल, यमुना और क्वारी में बाढ़ आने पर 42 गांव प्रभावित होंगे। बाढ़ से निपटने के लिए चकरनगर क्षेत्र में 14 बाढ़ चौकियां प्रशासन की ओर से बनाई गई हैं। प्रशासन ने 20 नाव और चार सेंचुरी की मोटर बोट बचाव के लिए लगाई हैं। चौकियों की पड़ताल में तैयारियां सिर्फ कागजों में मिलीं।
भारेश्वर मंदिर के पास सड़क और आसपास के खेतों में पानी भर चुका है। यहां खड़ी मोटरबोट खराब मिली। नाविक अजय ने बताया कि मोटरबोट सुबह सही थी लेकिन अब स्टार्ट नहीं हो रही है। पड़ताल में परिषदीय विद्यालय में बनाई भरेह बाढ़ चौकी पर कोई तैनात नहीं था। चौकी की जानकारी देता कोई संदेश भी नहीं लिखा था। इससे पता ही नहीं चल पा रहा था कि यहां चौकी बनी हुई है।
भरेह से लगभग आठ किमी दूर गढ़ा कसदा में भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाढ़ चौकी बनाई गई है। यहां बुधवार दोपहर 2:18 बजे ताला पड़ा हुआ था। उधर, राजपुर ब्लॉक मुख्यालय पर बनी बाढ़ चौकी के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सका। एसडीएम ने भी बताया कि वह पूछकर बताएंगे।
किए जा रहे हैं सुधार
अभी कर्मचारियों को बाढ़ क्षेत्र में घूमने के निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में हालात देखने के बाद गुरुवार सुबह से कर्मचारी मुस्तैदी से लग जाएंगे। लगातार निगरानी की जा रही है। बैनर आदि बाढ़ चौकियों पर लगवाए जा रहे हैं। मोटर बोट गड़बड़ होने जानकारी करके उसका सुधार कराया जाएगा।
- ब्रह्मानंद कठेरिया, एसडीएम चकरनगर