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कानपुर में पहली बार जन्मा दो सिर वाला बच्चा

Sun, 17 Jan 2016 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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शहर में पहली बार शनिवार को एक महिला ने दो मुंह वाले बच्चे को जन्म दिया। मां-बेटे की स्थिति सामान्य है। दो बेटियों के बाद ऑपरेशन से जन्मे इस बच्चे को लेकर परिजन औरैया चले गए हैं। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में जुड़वा बच्चा होने की बात सामने आई थी लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, अंडाणु और शुक्राणु के पूरी तरह अलग न हो पाने के कारण जुड़वा बच्चे पूरी तरह विकसित न हो सके।
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कानपुर देहात के संदलपुर क्षेत्र के जशापुर  निवासी सतीश तिवारी किसान हैं। उनकी पत्नी अनीता देवी (28) को प्रसव पीड़ा के बाद शुक्रवार को औरैया के न्यू मां सरोज नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पेट में जुड़वा बच्चे होने के कारण देर रात ही अनीता को कानपुर में फैक्ट्री चौराहा स्थित स्टार मेडिकल सेंटर लाया गया।

शनिवार सुबह 5:30 बजे स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अंतरा देवराय ने ऑपरेशन किया। बच्चे के जन्म के बाद उन्हें दोबारा औरैया के नर्सिंग होम में भेज दिया गया। जहां दोनों स्वस्थ्य हैं। मेडिकल सेंटर के एमडी डॉ. डीके शास्त्री ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा बच्चा पहली बार देखा है।
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एक दिमाग कहेगा सोना, दूसरा कहेगा जागेंगे
 दो सिर वाले बच्चे के पैदा होने के बाद तमाम सवाल लोगों के जेहन में तैर रहे हैं। मसलन क्या भूख लगने पर दोनों सिर के मुंह को खाना खिलाया जाएगा? क्या नींद आने पर दोनों सिर सोएंगे? क्या चोट लगने पर दोनों सिर के मुंह से रोना फूटेगा? आदि आदि। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आरके त्रिपाठी कहते हैं कि इस बच्चे का शरीर तो एक है लेकिन दिमाग दो हैं और दोनों विकसित लग रहे हैं।

लिहाजा दोनों दिमाग अपने-अपने तरीके से काम करेंगे। हो सकता है कि एक दिमाग सोने को कहे तो दूसरे सिर में स्थित दिमाग जागने को बोले। यही स्थिति भूख और अन्य कामों के लिए हो सकती है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होगा, वैसे-वैसे इन सब सवालों के जवाब मिलेंगे।

सबसे पहले बर्मा में पैदा हुआ था बच्चा
डॉक्टरों के मुताबिक सबसे पहले बर्मा में दो सिर और एक धड़ वाले बच्चे का जन्म हुआ था। वह बच्चा पूरे दुनिया के लिए कौतूहल का विषय था। इस कारण ऐसे बच्चों को श्यामीज ट्विंस भी कहते हैं।

दोनों मुंह से पिया दूध
बच्चे के पिता सतीश तिवारी ने बताया कि रात में बच्चे ने दोनों मुंह से दूध पीया। मां का ऑपरेशन होने के कारण वह दूध नहीं पिला सकती इसलिए उसके दूध को बच्चे की मुंह में डाला गया। दोनों सिरों के मुंह से दूध पिया गया। नवजात 3.45 किलोग्राम का है। फिलहाल मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

ऐसे बच्चों को अलग करना मुश्किल
जुड़े हुए बच्चे के अगर सभी अंग अलग-अलग हैं तो उन्हें थोड़ा बड़ा होने पर अलग किया जा सकता है। लेकिन इस बच्चे का पूरा शरीर एक ही है सिर्फ सिर दो हैं। ऐसे बच्चे के बड़े होने के बाद पूरा परीक्षण करने पर ही कुछ कहा जा सकता है।
- डॉ. आरके त्रिपाठी, पीडियाट्रिक सर्जन, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

रेयर होता है एेसा
ऐसे केस को थोरैकोपेगस कहते हैं। जुड़वा बच्चे आमतौर पर दो अंडाणु और दो शुक्राणु के मिलन से पैदा होते हैं। कभी-कभी एक अंडाणु और एक शुक्राणु मिलन के बाद अलग-अलग हो जाते हैं और जुड़वा बच्चे होते हैं। इस मामले में एक अंडाणु और एक शुक्राणु मिलन के बाद पूरे नहीं अलग हो पाए इसलिए शरीर एक रह गया लेकिन सिर दो हो गए।    
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-डॉ. यशवंत राव, विभागाध्यक्ष बाल रोग जीएसवीएम कॉलेज
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